अचानक एक डॉक्टर से मुलाकात हुई जिसने हमें पोल्ट्री व्यवसाय के बारे में समझाया और हमने सिर्फ 100 मुर्गियों के साथ काम शुरू कर दिया
बहादुर अली स्मरण करते हैं, “यह 1984 की बात है, यहीं से हमारा पोल्ट्री में प्रवेश हुआ.” लेकिन कुक्कुट पालन अलग चीज थी और उसे बेचना दूसरी चीज.
वे बताते हैं, “उन सौ मुर्गियों को बेचने में जो कठिनाई महसूस हुई उसे मैंने एक चुनौती के रूप में लिया और सोचा कि क्यों न मैं खुद इसकी मार्केटिंग करूं.” उनके प्रयासों का नतीजा था कि 1996 तक आइबी ग्रुप का टर्न ओवर 5 करोड़ रु. तक पहुंचा.
आज अली का आइबी ग्रुप की कुक्कुट पालन क्षमता 50 लाख से अधिक है. उनके उत्पादों में पैकेज्ड दूध, खाद्य तेल, मछली के फीड आदि शामिल हैं. उनका बिजनेस छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, विदर्भ और उड़ी में फैला हुआ है.
लेकिन उनका काम ज्यादातर गांवों में है तो कर्मचारियों में भी 90 फीसदी गांव वाले. अली पहले बेचने की चिंता करते हैं, फिर तकनीक के साथ उसका उत्पादन, ताकि सरप्लस न हो.