सुषमा के स्नेहिल सृजन
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महर्षि वाल्मीकि
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महर्षि वाल्मीकि को मुख्य तौर से रामायण महाकाव्य के रचयिता के रूप में जाना जाता है
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वाल्मीकि जी को उनकी विद्वता और तप के कारण महर्षि की पदवी प्राप्त हुई थी
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मार्ग सदा अपनाइए, मर्यादा संस्कार। सीख सिखाते पर्व हैं, अहंकार की हार।।
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कितना भी साम्यर्थ हो, करना मत अभिमान। त्रेता युग से सीखिए, आता है अवसान।।
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कितना भी साम्यर्थ हो, करना मत अभिमान। त्रेता युग से सीखिए, आता है अवसान।।
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’सुषमा’ सुमिरन कीजिए, राम नाम सुख सार। द्वेष दंभ पाखंड से, नहीं जगत उद्धार।।
”सुषमा प्रेम पटेल (रायपुर छ.ग.)
लेखिका
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