सुषमा के स्नेहिल सृजन

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मनहरण घनाक्षरी  प्रभाकर

जलेबी

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अंबर प्रभाती दृश्य, झूम-झूम करे नृत्य , पूर्व दिशा दिवाकर , नाच रहे मोर हैं ।

जलेबी

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मोह रही पल-पल, झरने की कल-कल , गौरैया फुदक रही , आनंद विभोर हैं ।

जलेबी

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गगन विशाल छोर, करते कतार शोर , पंछी करे कलरव, लाली युक्त भोर हैं।

जलेबी

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‘सुषमा’ प्रणाम करे, अर्घ्य जल घड़ा धरे , प्रभाकर आराधना  , खड़े कर जोर हैं।

 ”सुषमा प्रेम पटेल (रायपुर छ.ग.)

लेखिका 

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