सुषमा के स्नेहिल सृजन
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मनहरण घनाक्षरी जय माँ कुष्मांडा
जय माँ कुष्मांडा
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नवरात्र-पूजन के चौथे दिन कूष्माण्डा देवी के स्वरूप की उपासना की जाती है
जय माँ कुष्मांडा
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इस दिन साधक का मन 'अनाहत' चक्र में अवस्थित होता है।
जय माँ कुष्मांडा
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तेजोमयी जगदम्बा, शिवसुंदरी कुष्मांडा, सृष्टि सृजनकारी माँ, व्यापक प्रसंग है।
जय माँ कुष्मांडा
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अष्टभुजी आदिशक्ति, प्रेम भाव करो भक्ति, रोग दोष नाश कारी, आनंद उमंग है।
जय माँ कुष्मांडा
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अष्ट सिद्धि नव निधि, मंगल पूजन विधि, नैवेद्य अर्पण कर, प्रेमल तरंग है।
जय माँ कुष्मांडा
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अष्ट सिद्धि नव निधि, मंगल पूजन विधि, नैवेद्य अर्पण कर, प्रेमल तरंग है।
जय माँ कुष्मांडा
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अष्ट सिद्धि नव निधि, मंगल पूजन विधि, नैवेद्य अर्पण कर, प्रेमल तरंग है।
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”सुषमा प्रेम पटेल
(रायपुर छ.ग.)
लेखिका
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