सुषमा के स्नेहिल सृजन

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पुरुषार्थ

पूर्वाक्षरी अलंकृत

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पुरुषार्थ 

धर्म

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शास्त्र अनुसार, त्रिवर्ग कर्तव्य पूर्ण, आधार है सर्वश्रेष्ठ, ईश्वर आभास का।

अर्थ

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अर्थ *का संचय वही, करते अज्ञानी जन, अधिक न श्रेष्ठ कभी, करना प्रयास का।

अर्थ

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अर्थ *का संचय वही, करते अज्ञानी जन, अधिक न श्रेष्ठ कभी, करना प्रयास का।

काम

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काम* वासना से परे, हृदय आनंद भरे, ‘सुषमा’ उद्देश्य लक्ष्य, सिद्धांत विश्वास का।

मोक्ष

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मोक्ष * प्राप्ति साधन है, चतुर्विध पुरुषार्थ, शास्त्र विधि संरचना, वैकुण्ठ निवास का।

 ”सुषमा प्रेम पटेल (रायपुर छ.ग.)

लेखिका 

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