सुषमा के स्नेहिल सृजन
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श्याम सलोना
श्याम सलोना
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द्वार सजाओ, दीप जलाओ, आंगन में।
गीत सुनाओ, मिलजुल गाओ, जीवन में।।
श्याम सलोना
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खुशी मनाओ, नाचो गाओ, रंग रसिया।
श्याम सलोना, नटखट ग्वाला, मन बसिया।।(१)
श्याम सलोना
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हिलमिल खेलो, रंग उड़ेलो, दामन में।
वंशी बाजे, राधा नाचे, मधुवन में।।
करता चोरी, सीना जोरी, गलियन में।
रास रचाए, चित्त चुराए, कुंजन में।।(२)
श्याम सलोना
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माधव मोहन, करती वंदन, चरणन में।
हे गिरधारी, रास बिहारी, निधिवन में।।
श्याम सलोना
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’सुषमा’ हँसती, बातें करती, नैनन में।
है अलबेली, नुपुर बजाती, कानन में।(३)
”सुषमा प्रेम पटेल (रायपुर छ.ग.)
लेखिका
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