युवा धर्म संसद में CM मोहन यादव का संदेश, बोले- युवाओं के भरोसे ही देश में आएगा रामराज

उज्जैन : युवा धर्म संसद के समापन सत्र में शनिवार को युवाओं की भूमिका, भारतीय संस्कृति और रामराज के विचार पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रामायण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि महर्षि विश्वामित्र ने राजा दशरथ से बड़ी सेना मांगने के बजाय केवल श्रीराम और लक्ष्मण पर भरोसा जताया था। उन्होंने कहा कि उन्हें भी देश के युवाओं पर भरोसा है और युवाओं के सामर्थ्य से ही देश में रामराज की स्थापना का मार्ग प्रशस्त होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की ऋषि-मुनियों की परंपरा में हमेशा युवाओं पर विश्वास किया गया है। जब देश का युवा धर्म संसद जैसे मंच पर बैठकर अपनी संस्कृति और परंपराओं पर विचार करता है, तो यह गर्व का विषय है।
युवाओं से बोले- चुनौतियों से ही मिलती है सफलता
डॉ. मोहन यादव ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि सफलता बिना संघर्ष के हासिल नहीं होती। जीवन में चुनौतियां और परेशानियां आती हैं, लेकिन इन्हीं परिस्थितियों के बीच व्यक्ति अपनी क्षमता साबित करता है।
उन्होंने कहा कि यदि आत्मविश्वास मजबूत हो और लक्ष्य स्पष्ट हो, तो संसाधनों की कमी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बनती। भगवान श्रीराम का जीवन इसका उदाहरण है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास और धैर्य के साथ आगे बढ़कर आदर्श स्थापित किया।
21वीं शताब्दी भारत की- CM
मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया भारत को समझने में समय ले रही है, लेकिन 21वीं शताब्दी भारत की है। भारत आज वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास के साथ अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।
उज्जैन की सांदीपनि ऋषि की परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि निस्वार्थ मित्रता भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण सीख है और किसी मित्र की सहायता इस तरह करनी चाहिए कि उसे कभी स्वयं को छोटा महसूस न करना पड़े।
आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण बोले- कृतज्ञता ही मनुष्यता की पहचान
युवा धर्म संसद के संरक्षक आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण ने कहा कि अधर्म और असमानता से सत्ता और समाज का संतुलन प्रभावित होता है। उन्होंने महाभारत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि द्रुपद की एक चूक का प्रभाव द्रोणाचार्य जैसे आचार्य के जीवन पर पड़ा।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की चूक का प्रभाव सीमित हो सकता है, लेकिन सत्ता की चूक का असर व्यापक हो सकता है। भारत की पहचान उसकी ज्ञान परंपरा और गुरुकुल संस्कृति से जुड़ी है।
आचार्य ने कहा कि युवा धर्म संसद का उद्देश्य केवल नौकरी या स्टार्टअप जैसे विषयों पर चर्चा करना नहीं, बल्कि युवाओं को संवेदनशील, विचारशील और भारतीय जीवन-दृष्टि से जोड़ना भी है।
सितंबर 2027 में द्वारका में होगी अगली युवा धर्म संसद
समापन सत्र के दौरान आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण महाराज ने घोषणा की कि अगली युवा धर्म संसद सितंबर 2027 में द्वारका में आयोजित की जाएगी।
कार्यक्रम में सेवाज्ञ संस्थानम् के राष्ट्रीय सचिव माधव कुमार तिवारी और उद्यमी सचिन बंसल सहित अन्य लोग मंच पर मौजूद रहे।

