छत्तीसगढ़

नक्सल हिंसा पीड़ितों के पुनर्वास पर केंद्र-राज्य सरकार का जोर, दंतेवाड़ा में 768 दिव्यांगजनों को मिलेंगे कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण

रायपुर : नक्सलवाद से मुक्ति के बाद अब बस्तर में हिंसा से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और उनके जीवन को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद ने पांच दशकों तक बस्तर के गरीब और आदिवासी परिवारों को गहरी पीड़ा दी है। अब पीड़ितों के घावों पर मरहम लगाना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मिलकर काम करती रहेगी।

अमित शाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत दंतेवाड़ा में आयोजित निःशुल्क कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर के दूसरे चरण के शुभारंभ अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी वर्चुअली शामिल हुए।

दंतेवाड़ा में 768 दिव्यांगजनों को मिलेगा लाभ

दंतेवाड़ा में 15 से 17 अक्टूबर तक तीन दिवसीय शिविर आयोजित किया जा रहा है। इसमें दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिले के कुल 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और विभिन्न सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।

लाभार्थियों में दंतेवाड़ा जिले के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 दिव्यांगजन शामिल हैं। शिविर का आयोजन भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर और सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से किया जा रहा है। लाभार्थियों को व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी, श्रवण यंत्र, स्मार्ट वॉकिंग स्टिक और कृत्रिम अंग जैसे उपकरण दिए जा रहे हैं।

अमित शाह ने बताया कि इससे पहले 5 से 7 अक्टूबर तक जगदलपुर में आयोजित शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे। इनमें बस्तर के 1,570 से अधिक लोग शामिल थे। उन्होंने कहा कि यह संख्या दशकों तक नक्सली हिंसा से प्रभावित रहे परिवारों की पीड़ा को दर्शाती है।

आईईडी विस्फोटों में दिव्यांग हुए लोगों का पुनर्वास प्राथमिकता

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोटों में अनेक निर्दोष नागरिकों ने अपने हाथ-पैर गंवाए। उन्होंने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कहा कि केवल नक्सलवाद समाप्त कर देना पर्याप्त नहीं है। हिंसा से प्रभावित लोगों को दोबारा आत्मनिर्भर बनाना और उनके लिए सम्मानजनक जीवन की व्यवस्था करना भी उतना ही जरूरी है।

उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराने से उनके दैनिक जीवन को आसान बनाया जा सकता है। इस कार्य में छत्तीसगढ़ सरकार, जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग, भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर और भारतीय जैन संघ सहित कई संस्थाएं सहयोग कर रही हैं।

आत्मसमर्पण करने वाले 8,526 नक्सलियों के पुनर्वास के प्रयास

अमित शाह ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और विकास से जुड़े आंकड़े साझा करते हुए बताया कि लगभग 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। पुनर्वास के तहत किए गए प्रमुख कार्यों में शामिल हैं:

  • 7,328 लोगों के बैंक खाते खोले गए।
  • 1,620 लोगों को इनामी राशि और 7,882 लोगों को प्रोत्साहन राशि दी गई।
  • 455 लोगों को नौकरी दी गई।
  • 129 लोगों को भूमि आवंटित की गई।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4,014 आवास उपलब्ध कराए गए।
  • 2,308 आदिवासियों को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया गया।
  • 6,763 नए राशन कार्ड बनाए गए।
  • 2,808 परिवारों को निःशुल्क बिजली उपलब्ध कराई गई।
  • संपर्क सुविधाओं के विस्तार के लिए 372 सड़क परियोजनाएं शुरू की गईं और 670 पुलियों का निर्माण किया जा रहा है।
  • 48,526 लोगों के आधार कार्ड बनाए गए और 44 पंचायतों को इलवाद पंचायत पुरस्कार के तहत सम्मानित किया गया।

गृह मंत्री ने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और उनके जीवन में स्थायी बदलाव लाना है।

200 से अधिक सुरक्षा शिविर बनेंगे ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’

अमित शाह ने बताया कि नक्सलवाद के खिलाफ अभियान के दौरान 500 से अधिक सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए थे। इनमें से 200 से अधिक शिविरों को अब ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर पहले सुरक्षा बलों के जवान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करते थे, वहां अब केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी बैठकर विकास और जनकल्याण के कार्यों को आगे बढ़ाएंगे। इन सेवा केंद्रों के माध्यम से बस्तर में स्थानीय जरूरतों के अनुसार सुविधाओं और आजीविका के अवसरों का विस्तार किया जाएगा।

बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम और नियद नेल्लानार से बदल रही तस्वीर

अमित शाह ने बस्तर में शांति और विकास के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की पहलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम, नियद नेल्लानार और मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना जैसी पहलें क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।

उन्होंने कहा कि जिस बस्तर में कभी गोलियों और बम धमाकों की आवाजें सुनाई देती थीं, वहां अब युवा खेलों में हिस्सा ले रहे हैं और अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ा रहे हैं। बस्तर ओलंपिक युवाओं को प्रतिभा दिखाने का अवसर दे रहा है, जबकि बस्तर पंडुम के जरिए जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा मिल रहा है।

नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से दूरस्थ गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य उन इलाकों में सड़क, बिजली, पेयजल और दूसरी आवश्यक सुविधाओं का विस्तार करना है, जो लंबे समय तक इनसे वंचित रहे।

बस्तर को देश के अग्रणी जनजातीय क्षेत्रों में शामिल करना लक्ष्य: मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति से छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद की दशकों पुरानी चुनौती से मुक्ति मिली है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय सुरक्षा बलों के साहस और बलिदान के साथ बस्तर की जनता के सहयोग को दिया।

मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ संघर्ष में शहीद हुए जवानों और हिंसा में जान गंवाने वाले निर्दोष ग्रामीणों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि अब राज्य सरकार का संकल्प बस्तर को देश के सबसे विकसित जनजातीय क्षेत्रों में अग्रणी बनाना है।

साय के मुताबिक, नियद नेल्लानार योजना के तहत 500 से अधिक गांवों में सड़क और बिजली की सुविधाएं पहुंची हैं। दूरसंचार सेवाओं, घरों तक नल से जल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर भी काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इन क्षेत्रों में 431 स्कूल खोले गए हैं और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य बस्तर के अंतिम गांव और अंतिम व्यक्ति तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। नक्सलवाद से मुक्ति के बाद शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल और संचार सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है।

सेवा डेरों में प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर

मुख्यमंत्री ने बताया कि शहीद वीर गुंडाधुर के गांव नेतानार में पहला सेवा डेरा शुरू किया गया है। यहां स्थानीय लोगों को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा जंगलों में उपलब्ध इमली की पैकेजिंग और पारंपरिक ढेंकी पद्धति से चावल तैयार करने जैसी आजीविका गतिविधियां भी शुरू की गई हैं।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में दूसरे सेवा डेरों में भी स्थानीय संसाधनों और जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इससे युवाओं और ग्रामीण परिवारों को रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसर मिल सकेंगे।

खेती, पशुपालन और सिंचाई से बढ़ेगी ग्रामीण परिवारों की आय

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर के समग्र विकास के लिए कृषि, पशुपालन और स्थानीय आजीविका को भी प्राथमिकता दी जा रही है। पशुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए परिवारों को दो-दो गायें उपलब्ध कराने और डेयरी विकास के माध्यम से ग्रामीण आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार में बड़ी सिंचाई परियोजनाओं के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर लगभग 80 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे कृषि उत्पादन बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जारी रहेगा अभियान

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सली हिंसा के कारण अंग गंवाने वाले निर्दोष ग्रामीणों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराना केवल सहायता देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता लौटाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का प्रयास है कि प्रभावित व्यक्ति सम्मान के साथ जीवन जी सकें और समाज की मुख्यधारा से जुड़ें।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी कहा कि नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोटों में कई निर्दोष ग्रामीणों का जीवन प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि नक्सली हिंसा से प्रभावित कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति पुनर्वास और सहायता से वंचित न रहे।

कृत्रिम अंग मिलने से लाभार्थियों के जीवन में लौटी उम्मीद

कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने दिव्यांगजनों से बातचीत कर उनके अनुभव जाने। सुकमा जिले के दिव्यांग पुलिस जवान मड़काम मुन्ना ने बताया कि वर्ष 2013 में गश्त के दौरान आईईडी विस्फोट में उनका बायां पैर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। कृत्रिम पैर मिलने के बाद अब वे फिर से चल पा रहे हैं।

बीजापुर जिले के धर्मारम निवासी चंद्रैया सपका ने बताया कि वर्ष 2012 में चिंतावागु नदी में मछली पकड़ने जाते समय आईईडी विस्फोट में उन्होंने अपना दायां पैर खो दिया था। शिविर में कृत्रिम पैर मिलने के बाद उन्हें दोबारा चलने में मदद मिली।

वहीं, दंतेवाड़ा जिले के जावंगा और मेटापाल के अजय सोरी तथा कोसी पोडियाम ने ट्राइसाइकिल मिलने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि इससे दैनिक आवागमन आसान होगा। लाभार्थियों ने इस पहल के लिए केंद्र और राज्य सरकार तथा सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में बस्तर सांसद महेश कश्यप, विधायक चैतराम अटामी, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य ओजस्वी मंडावी सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

केंद्र और राज्य सरकार ने दोहराया कि नक्सलवाद से मुक्त बस्तर में अब शांति, पुनर्वास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि क्षेत्र का प्रत्येक गांव विकास की मुख्यधारा से जुड़े और हर परिवार को बेहतर जीवन के अवसर मिलें।

News Desk

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