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रूस के कामचटका में 8.8 तीव्रता का भूकंप, सुनामी अलर्ट से कई देश दहशत में

कामचटका में भूकंप: प्रशांत महासागर में दहशत का माहौल-रूस के कामचटका इलाके में आए 8.8 तीव्रता के भूकंप ने पूरे प्रशांत महासागर क्षेत्र में दहशत फैला दी है। सुबह आए इस भूकंप के झटके इतने ज़ोरदार थे कि सिर्फ़ रूस ही नहीं, बल्कि आसपास के कई देशों में भी लोग सहम गए। भूकंप के बाद सुनामी की आशंका ने चिंता और बढ़ा दी है, जिससे कई देशों ने तुरंत अलर्ट जारी कर दिए हैं। यह भूकंप 2011 की भयानक सुनामी की यादें ताज़ा कर गया है।

भूकंप की वजह और तीव्रता-अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, यह भूकंप समुद्र के अंदर, लगभग 19 किलोमीटर की गहराई में आया। इसकी वजह से ज़मीन पर भूकंप का असर सीधे और ज़्यादा महसूस हुआ। भूकंप का केंद्र पेट्रोपावलोव्स्क-कामचत्स्की से लगभग 133 किलोमीटर दूर दक्षिण-पूर्व में था। इस भूकंप को ‘मेगाथ्रस्ट’ श्रेणी में रखा गया है, जो टेक्टॉनिक प्लेटों के टकराने से आता है और अक्सर बड़े पैमाने पर तबाही लाता है। यही वजह है कि इसका असर इतना व्यापक क्षेत्र में महसूस हुआ।

 सुनामी का खतरा: कौन से देश हैं प्रभावित?-भूकंप के बाद प्रशांत महासागर में सुनामी की चेतावनी जारी की गई। अमेरिकी सुनामी वार्निंग सेंटर ने बताया कि हवाई और रूस के कुछ द्वीपों पर तीन मीटर तक ऊँची लहरें आ सकती हैं। जापान, गुआम, चिली और ताइवान जैसे देशों में 1-3 मीटर ऊँची लहरों का खतरा है। फिलीपींस, फिजी और न्यूजीलैंड में भी हल्के असर की आशंका है। ऑस्ट्रेलिया, चीन, कोरिया और वियतनाम को भी अलर्ट जारी किया गया है।

 जापान में स्थिति और फुकुशिमा प्लांट-जापान में होक्काइदो और होन्शू द्वीपों के लिए तुरंत अलर्ट जारी किया गया, जबकि शिकोकू और क्यूशू के लिए एडवाइजरी जारी की गई। एहतियात के तौर पर, फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट को खाली कराया गया। सोशल मीडिया पर आए वीडियो में ऊँची इमारतों का हिलना और लोगों के घबराकर भागना दिखाया गया है। कई जगहों पर इमारतों में दरारें आ गई हैं और समुद्र के किनारे लहरें तेज़ी से बढ़ रही हैं।

वर्तमान स्थिति और राहत कार्य-फिलहाल किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन हालात पर नज़र रखी जा रही है। अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियाँ लगातार स्थिति पर नज़र रख रही हैं। लोगों को समुद्र के किनारे से दूर रहने और ऊँचे इलाकों में शरण लेने की सलाह दी गई है। सुनामी अलर्ट अभी भी जारी है और प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन टीमें तैनात हैं।

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