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धामी सरकार के विज्ञापन खर्च पर हरीश रावत का हमला, बोले- 1000 करोड़ ज्यादा

 हरीश रावत का आरोप: धामी सरकार के विज्ञापनों पर 1000 करोड़ का भारी भरकम खर्च!

क्या धामी सरकार जनता के पैसे का सही इस्तेमाल कर रही है?-उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने धामी सरकार पर एक गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सरकार विज्ञापनों पर 1000 करोड़ रुपये से भी ज़्यादा खर्च कर रही है। रावत का मानना है कि राज्य में पलायन, बेरोजगारी और कुपोषण जैसी गंभीर समस्याएं हैं, ऐसे में इतना बड़ा खर्च करना समझ से परे है। उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल में विज्ञापन पर केवल 100 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जिसमें ज़रूरी विज्ञापन शामिल थे।

 वित्तीय संसाधनों का गलत इस्तेमाल?-हरीश रावत का मानना है कि धामी सरकार का यह खर्च राज्य के सीमित संसाधनों का गलत इस्तेमाल है। उनका कहना है कि सरकार को विकास कार्यों और जनता की भलाई पर ध्यान देना चाहिए। रावत ने ज़ोर देकर कहा कि सरकार को विज्ञापनों और प्रचार पर ज़्यादा पैसे खर्च करने की बजाय, ज़रूरतमंद लोगों की मदद करनी चाहिए। उनका मानना है कि सरकार को अपनी प्राथमिकताएं तय करते समय जनता की ज़रूरतों को ध्यान में रखना चाहिए।

 मुख्यमंत्री सहायता कोष का महत्व-हरीश रावत ने अपने कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री सहायता कोष से लोगों की मदद करने का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि उनका हमेशा से ज़रूरतमंद लोगों की मदद करने का इरादा रहा है। रावत ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर कुछ मदद गलत लोगों तक भी पहुंची है, तो इसमें माध्यमों की गलती हो सकती है, उनका इरादा किसी को निराश करने का नहीं था। इससे पता चलता है कि रावत का मानना है कि सरकार को लोगों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए।

राजनीतिक चर्चा और आलोचना-हरीश रावत के इस बयान के बाद राज्य में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। लोग इस मुद्दे पर खुलकर बात कर रहे हैं और धामी सरकार की आलोचना भी हो रही है। रावत का कहना है कि धामी सरकार का यह खर्च जनता की प्राथमिकताओं से मेल नहीं खाता है। इस मामले पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं, जिससे आने वाले समय में राजनीति में और भी हलचल मचने की संभावना है।

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