छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का अलर्ट, CM साय ने सभी कलेक्टरों को दिए सतर्क रहने के निर्देश

रायपुर : छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते कई जिलों में नदी-नाले उफान पर हैं और निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। बारिश को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि बारिश के कारण आम जनता को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए और प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता से संचालित किया जाए।

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खाड़ी में बना चक्रवात ‘अर्नब’ बीती रात ओडिशा और आंध्रप्रदेश के तटीय क्षेत्र से टकराया। इसके प्रभाव से छत्तीसगढ़ में पिछले 48 घंटे से बारिश का दौर जारी है। बस्तर संभाग सबसे ज्यादा प्रभावित बताया जा रहा है। लगातार बारिश के कारण महानदी और इंद्रावती समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। कई स्थानों पर जलभराव और बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। प्रभावित जिलों में स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है। मौसम विभाग ने प्रदेश के 20 से अधिक जिलों में बारिश को लेकर चेतावनी जारी की है।

प्रदेश में सामान्य से ज्यादा बारिश

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के 25 सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में इस मानसून सीजन में अब तक सामान्य औसत की 100.1 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है।

1 जून से 25 सितंबर तक प्रदेश में औसतन 1082.4 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई है, जबकि पिछले 10 वर्षों के आधार पर इस अवधि की औसत संभावित बारिश 1081.5 मिलीमीटर है। वहीं, पिछले 24 घंटे में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में औसतन 52.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।

जगदलपुर में बाढ़ जैसे हालात

जगदलपुर और आसपास के क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण इंद्रावती नदी के सहायक नाले उफान पर हैं। गोरियाबहार नाला भरने से कई गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है। तिरिया, पोटनार और जगदलपुर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है।

अमागुड़ा क्षेत्र में हाईवे से लगी निचली बस्ती में पानी भर गया है। लोगों को घरों से सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है। बारिश का असर वन विभाग के कार्यालय पर भी पड़ा है, जहां कई शाखाओं में पानी भरने से रिकॉर्ड भीग गए।

इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे स्थित तोमर फार्म हाउस भी जलमग्न हो गया। यहां पांच लोगों के फंसे होने की सूचना के बाद SDRF की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू अभियान शुरू किया। फार्म हाउस परिसर में पानी भरने के साथ वहां खड़ा एक ट्रक भी पानी में डूब गया।

कांकेर में दूध नदी उफान पर, स्कूल बंद

कांकेर जिले में पिछले 48 घंटे से लगातार बारिश हो रही है। आमाबेड़ा, कुरना सहित अंदरूनी इलाकों में नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया है। निचले क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी है।

बारिश के कारण कई स्थानों पर पेड़ गिरने से आवागमन प्रभावित हुआ। पुलिस और यातायात विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंचकर पेड़ों को हटाया। दूध नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क करने के लिए मस्जिद से भी अलाउंस कराया।

कोंडागांव में कई गांवों का संपर्क प्रभावित

कोंडागांव जिले में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही है। नदी-नालों के उफान पर आने से ग्रामीण क्षेत्रों की कई सड़कें जलमग्न हो गई हैं। कई पुल-पुलियों के ऊपर से पानी बह रहा है, जिससे गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क प्रभावित हुआ है।

सुरक्षा को देखते हुए 25 सितंबर को जिले के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव टीमों को तैनात किया है। टीमों द्वारा जलभराव वाले इलाकों का जायजा लिया जा रहा है और जरूरत के अनुसार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

सुकमा में निचली बस्तियां खाली कराई जा रहीं

सुकमा जिले में लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। कोंटा क्षेत्र की निचली बस्तियों को खाली कराया जा रहा है। डोंडरा पंचायत में कई घरों को खाली कराने के लिए जनपद पंचायत की टीम मौके पर मौजूद है।

छिंदगढ़ क्षेत्र के ओलेर, नेतानार, किकिरपाल, तालनार, गुम्मा और गंजेनार समेत कई इलाकों में जलस्तर बढ़ा हुआ है। दोरनापाल-कोंटा और दोरनापाल-सुकमा के बीच नेशनल हाईवे पर कई जगह पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ है। पुलिस और प्रशासन की टीमें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

सिकासार बांध से 15,500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया

गरियाबंद जिले के देवभोग और अमलीपदर तहसील में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही है। तेल नदी, सुख तेल नदी समेत कई बरसाती नाले उफान पर हैं।

सिकासार बांध करीब 87 प्रतिशत भर चुका है। सुरक्षा को देखते हुए बांध से 15,500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। कई इलाकों में घरों में पानी घुसने की स्थिति बनी हुई है। बेलाट नाला का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है।

भारी बारिश के कारण हजारों एकड़ खेत जलमग्न हो गए हैं। जिला प्रशासन ने बारिश की स्थिति को देखते हुए 25 सितंबर से शुरू होने वाली त्रैमासिक परीक्षाएं भी रद्द कर दी हैं। पिछले 24 घंटे में जिले में 200 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई है।

गंगरेल बांध के 10 गेट खोले गए

धमतरी जिले में लगातार बारिश के कारण जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। गंगरेल जलाशय 98.14 प्रतिशत भर चुका है और यहां 64,117 क्यूसेक पानी की आवक हो रही है।

बढ़ते जलस्तर को देखते हुए गंगरेल बांध के 10 गेट खोले गए हैं। इनसे कुल 54,950 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इसमें रुद्री बैराज से 6,000 क्यूसेक पानी नहर में और 48,950 क्यूसेक पानी महानदी में छोड़ा जा रहा है।

इसके अलावा मुरुमसिल्ली जलाशय 100 प्रतिशत, दुधावा 97.21 प्रतिशत और सोढ़ुर जलाशय 88.18 प्रतिशत भर चुका है। मुरुमसिल्ली से 7,286 क्यूसेक, दुधावा से 16,606 क्यूसेक और सोढ़ुर के पांच गेटों से 16,402 क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा जा रहा है।

महानदी का जलस्तर बढ़ा, गांवों में अलर्ट

लगातार बारिश और जलाशयों से पानी छोड़े जाने के कारण महानदी समेत आसपास के नदी-नालों का जलस्तर बढ़ रहा है। जिला प्रशासन ने महानदी किनारे बसे गांवों में अलर्ट जारी किया है।

लोगों से नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों के पास नहीं जाने की अपील की गई है। भारी बारिश को देखते हुए जिले के सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। जिन स्कूलों में त्रैमासिक परीक्षाएं शुरू हो चुकी थीं, उन्हें भी रद्द कर दिया गया है। स्थिति सामान्य होने के बाद परीक्षाओं को लेकर प्रशासन निर्णय लेगा।

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बालोद में बारिश से जनजीवन प्रभावित

बालोद जिले में लगातार बारिश के कारण नदियां, नाले और खेत-खलिहान पानी से भर गए हैं। कई छोटे नालों के ऊपर से पानी बहने के कारण विभिन्न स्थानों पर आवागमन प्रभावित हुआ है।

लगातार बारिश को देखते हुए जिले के स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है। कुछ स्कूलों में छात्र पहुंच चुके थे, जिन्हें बाद में वापस घर भेज दिया गया।

वहीं, सियादेवी वाटरफॉल भी बारिश के बाद पूरे प्रवाह में है और इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से जलभराव और नदी-नालों वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने की अपील की है।

News Desk

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