“IBS में इन 5 कुकिंग मिस्टेक्स से बचें, वरना बढ़ जाएगी गैस, ब्लोटिंग और पेट दर्द की दिक्कत”

पेट की गड़बड़ी का राज़: कहीं आपकी रसोई तो नहीं जिम्मेदार?-आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में पेट की समस्याएं, खासकर इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) बहुत आम हो गई है। इसका सीधा असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है, जिससे गैस, पेट फूलना, पेट में दर्द और कभी-कभी अचानक से शौच जाने की ज़रूरत जैसी परेशानियां हमें घेर लेती हैं। अक्सर हम इन समस्याओं को अनदेखा कर देते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी रोज़मर्रा की खान-पान की आदतें और खाना पकाने का तरीका इन परेशानियों को बढ़ा सकता है? आइए, इस लेख में हम उन आम गलतियों के बारे में जानते हैं जो आपके पाचन को बिगाड़ सकती हैं और कैसे आप अपनी रसोई में छोटे-छोटे बदलाव करके इन दिक्कतों से राहत पा सकते हैं।
FODMAP वाले खाने से दूरी, सेहत की ओर एक कदम-क्या आप जानते हैं कि कुछ खास तरह के कार्बोहाइड्रेट्स, जिन्हें FODMAP कहा जाता है, आपके पेट के लिए मुसीबत बन सकते हैं? ये ऐसे फूड्स होते हैं जिन्हें हमारा शरीर आसानी से पचा नहीं पाता। लहसुन, प्याज, बीन्स, गेहूं और सेब जैसी चीज़ों में ये खूब पाए जाते हैं। जब ये हमारे पेट में जाते हैं, तो ये आंतों में जाकर फर्मेंट (खमीर उठना) होने लगते हैं। इस प्रक्रिया से गैस बनती है, पेट फूल जाता है, दर्द होता है और कभी-कभी दस्त भी लग जाते हैं। यही कारण है कि IBS से परेशान लोगों को इन FODMAP युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन कम से कम करना चाहिए। अगर इन्हें खाना ही है, तो बहुत ही कम मात्रा में और हल्का पकाकर खाएं ताकि इनका असर कम हो सके।
तेल और घी का ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल, पाचन का दुश्मन-खाना पकाने में तेल, घी या मक्खन का ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल हमारे पाचन तंत्र को धीमा कर देता है। जब खाना पेट में ज़्यादा देर तक रहता है, तो उसमें फर्मेंटेशन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इससे गैस, पेट में ऐंठन और पेट फूलने जैसी समस्याएं और बढ़ जाती हैं। IBS से परेशान लोगों को अक्सर तला हुआ खाना, गाढ़ी क्रीमी सॉस वाली चीज़ें या मक्खन से बनी चीज़ें खाने के बाद ज़्यादा परेशानी होती है। ऐसे में, सबसे अच्छा तरीका है कि आप खाना कम तेल में पकाएं और स्टीम (भाप में पकाना), ग्रिलिंग या बेकिंग जैसे स्वस्थ तरीकों को अपनाएं। ये तरीके न केवल आपके खाने को हल्का बनाते हैं, बल्कि पाचन को भी बेहतर बनाते हैं।
एक बार में ज़्यादा खाना, पेट पर भारी पड़ सकता है-अगर आप पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो पोर्शन कंट्रोल यानी एक बार में कितना खाना खा रहे हैं, इस पर ध्यान देना बहुत ज़रूरी है। जब आप एक ही बार में बहुत ज़्यादा खाना खा लेते हैं, तो आपके पाचन तंत्र पर अचानक से दबाव बढ़ जाता है। इससे गैस ज़्यादा बनती है, पेट में दर्द होता है और बार-बार शौच जाने की ज़रूरत महसूस हो सकती है। इस समस्या से बचने का सबसे आसान तरीका है कि आप दिन भर में थोड़ा-थोड़ा करके कई बार खाएं। एक साथ पेट भरकर खाने के बजाय, दिन में 5-6 छोटे मील लें। इससे आपका पाचन तंत्र ज़्यादा आसानी से काम कर पाएगा और आपको पेट हल्का महसूस होगा।
ज़्यादा तापमान पर खाना पकाना, आंतों के लिए ठीक नहीं-खाना पकाने का तापमान भी हमारे पाचन पर गहरा असर डालता है। जब हम खाने को बहुत तेज़ आंच पर या ज़्यादा तापमान पर पकाते हैं, तो उसमें ‘एडवांस ग्लाइकेशन एंड प्रोडक्ट्स’ (AGEs) जैसे हानिकारक तत्व बन सकते हैं। ये तत्व हमारी आंतों में सूजन को बढ़ा सकते हैं, जो IBS के मरीजों के लिए और भी ज़्यादा नुकसानदायक साबित हो सकता है। इसके विपरीत, अगर खाने को धीमी आंच पर पकाया जाए, तो न केवल उसके पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं, बल्कि वह आसानी से पच भी जाता है। इसलिए, कोशिश करें कि आप अपने खाने को हमेशा मध्यम या धीमी आंच पर ही पकाएं। इससे आपका पाचन तंत्र स्वस्थ रहेगा।
सही कुकिंग मेथड अपनाएं, IBS को दूर भगाएं-IBS से पीड़ित लोगों के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि वे अलग-अलग तरह के खाना पकाने के तरीकों को आजमाएं और देखें कि उनके लिए सबसे अच्छा क्या काम करता है। उदाहरण के लिए, सब्जियों को भाप में पकाकर (स्टीम करके) या हल्का भूनकर (रोस्ट करके) खाना, या फिर कुकर में धीमी आंच पर पकाना, ये सभी तरीके आपके पाचन तंत्र पर कम दबाव डालते हैं। इस तरह से पका हुआ खाना न केवल आसानी से पच जाता है, बल्कि यह IBS के लक्षणों को कम करने में भी मदद करता है। सही तरीके से पका हुआ भोजन आपको ज़रूरी पोषण तो देता ही है, साथ ही आपके पेट को भी आराम पहुंचाता है।

