छत्तीसगढ़

रायपुर की सफाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव! 4 जोन में बंटेगा शहर, डिजिटल मैपिंग से होगी निगरानी, जानें कब से होगा लागू

रायपुर : राजधानी रायपुर की सफाई व्यवस्था में अब बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राजधानी में पहली बार सफाई और कचरा प्रबंधन की निगरानी डिजिटल मैपिंग के जरिए करने की तैयारी है। नई व्यवस्था नवंबर से लागू होने की संभावना है और इसके तहत शहर को चार जोन में बांटकर सफाई का काम जोनवार ठेके पर देने की योजना है। फिलहाल रायपुर के 70 वार्डों में 70 से ज्यादा अलग-अलग एजेंसियां सफाई का काम संभाल रही हैं। ऐसे में कर्मचारियों की वास्तविक संख्या, उनकी मैदान में मौजूदगी और कचरा उठाने वाले वाहनों की निगरानी एक चुनौती बनी हुई है। नई व्यवस्था में इन सभी पहलुओं को एकीकृत सिस्टम से जोड़ने की तैयारी है। नई व्यवस्था के तहत रायपुर को चार जोन में बांटकर सफाई का ठेका देने का प्रस्ताव है। इनमें ग्रामीण, उत्तर, दक्षिण और पश्चिम जोन शामिल हैं इसका मतलब यह होगा कि एक पूरे क्षेत्र की सफाई की जिम्मेदारी सीमित संख्या में एजेंसियों के पास रहेगी। इससे अधिकारियों के लिए यह देखना आसान होगा कि किस इलाके में सफाई का काम तय मानकों के मुताबिक हो रहा है या नहीं।

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जिम्मेदारी सीमित होने से किसी क्षेत्र में समस्या आने पर संबंधित एजेंसी की पहचान और जवाबदेही तय करना भी आसान हो सकता है। डिजिटल मैप पर दिखेगा सफाई का पूरा क्षेत्र नई व्यवस्था की सबसे खास बात डिजिटल मैपिंग होगी। इसके जरिए सफाई से जुड़े क्षेत्रों और जरूरी स्थानों को डिजिटल सिस्टम पर चिह्नित करने की योजना है। कर्मचारी और वाहन भी निगरानी में ठेका एजेंसी जितने सफाई कर्मचारियों की तैनाती बताएगी, उनकी वास्तविक मौजूदगी और काम की भी जांच की जा सकेगी। इसी तरह कचरा उठाने वाले वाहनों और उनके रूट को भी सिस्टम से जोड़ने की तैयारी है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि वाहन निर्धारित क्षेत्र में गया या नहीं और कचरा संग्रहण की व्यवस्था किस तरह संचालित हो रही है। सड़क, ड्रेनेज और पार्क भी होंगे मैप पर डिजिटल मैपिंग सिर्फ कचरा संग्रहण तक सीमित नहीं रहेगी। योजना के तहत सफाई से जुड़े सड़क-चौराहों, ड्रेनेज, पार्क और कचरा कलेक्शन प्वाइंट जैसे स्थानों को भी चिह्नित किया जाएगा। यानि, किसी क्षेत्र में कचरा कलेक्शन प्वाइंट या ड्रेनेज की सफाई की जिम्मेदारी तय है तो डिजिटल मैप के जरिए उस स्थान को संबंधित व्यवस्था से जोड़ा जा सकेगा। अभी 70 वार्डों में 70 से ज्यादा एजेंसियां वर्तमान व्यवस्था में रायपुर के 70 वार्डों में 70 से ज्यादा एजेंसियां सफाई का काम कर रही हैं।

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अलग-अलग वार्डों में अलग एजेंसियां होने के कारण पूरे शहर की सफाई व्यवस्था की एकीकृत निगरानी चुनौतीपूर्ण है। नई जोनवार व्यवस्था में इसी समस्या को कम करने की कोशिश की जा रही है। लक्ष्य यह है कि सफाई, कर्मचारी, वाहन और संबंधित संसाधनों की जानकारी एक ही निगरानी व्यवस्था में उपलब्ध हो। सफाई पर सालाना करीब 550 करोड़ रुपये का खर्च रायपुर में सफाई, कचरा प्रबंधन और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पर सालाना करीब 550 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। ऐसे में नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल सफाई का ठेका बदलना नहीं है। इसके जरिए खर्च के साथ काम की वास्तविक स्थिति, कर्मचारियों की तैनाती, संसाधनों और एजेंसियों की जिम्मेदारी की निगरानी को भी व्यवस्थित करने पर जोर है। नवंबर से लागू होने की संभावना नई जोनवार व्यवस्था और डिजिटल मैपिंग सिस्टम को नवंबर से लागू किए जाने की संभावना है। इसके लागू होने के बाद सफाई व्यवस्था की मॉनिटरिंग किस तरह होती है और मैदान में इसका कितना असर दिखाई देता है, यह महत्वपूर्ण होगा। नगरीय प्रशासन के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा के मुताबिक, आधुनिक तकनीक और डिजिटल मैपिंग के जरिए यह पता लगाने की कोशिश होगी कि किस क्षेत्र में कब और कितनी सफाई हुई। साथ ही संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों की जिम्मेदारी स्पष्ट करने पर जोर रहेगा। अगर यह सिस्टम प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो रायपुर में सफाई व्यवस्था की निगरानी पहले के मुकाबले ज्यादा व्यवस्थित और जवाबदेह तरीके से की जा सकेगी।

News Desk

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