
पंजाब का पानी संकट: क्या भविष्य में सूखा पड़ेगा साया?-पंजाब विधानसभा में हाल ही में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पानी के मुद्दे पर खूब बवाल मचाया। उन्होंने विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधा और पानी की कमी के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया। आइए जानते हैं पूरा मामला:
सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर: क्या हुआ दिल्ली में?-दिल्ली में हुई SYL नहर पर मीटिंग में सभी पार्टियों ने सहमति जताई, लेकिन मुख्यमंत्री मान ने कहा कि हर 25 साल में पानी के इस्तेमाल की समीक्षा जरूरी है, जो नहीं हुई। उन्होंने पुरानी सरकारों पर पानी के प्रबंधन में लापरवाही का आरोप लगाया।
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) और इंडस जल संधि: पंजाब का क्या हक?-
मान ने इंडस जल संधि रद्द होने पर प्रधानमंत्री का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि अब पंजाब को चिनाब, रावी, व्यास और कश्मीर की नदियों का पानी मिल सकता है। लेकिन उन्होंने ये भी साफ किया कि रिपेरियन सिद्धांत के मुताबिक, पंजाब को पानी पर पहला हक है।
सिंचाई में सुधार: क्या वाकई बढ़ा पानी का इस्तेमाल?-मान ने दावा किया कि उनकी सरकार ने सिंचाई के लिए नहरी पानी के इस्तेमाल को 21% से बढ़ाकर 63% कर दिया है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने पानी के महत्व को नहीं समझा, जबकि उनकी सरकार ने इस पर काम किया है।
हरियाणा पर आरोप: ज़्यादा पानी का इस्तेमाल?-मुख्यमंत्री ने हरियाणा पर आरोप लगाया कि उसने अपने हिस्से से ज़्यादा पानी इस्तेमाल किया है और अब और पानी मांग रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार केंद्र को पत्र लिख रही है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
केंद्र सरकार को चेतावनी: विदेशी दबाव से बचें!-मान ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि इंडस जल संधि को रद्द करने का फैसला किसी विदेशी दबाव में नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह पंजाब के हक का सवाल है।
विपक्ष पर हमला: 40 साल कहाँ थे?-मान ने विपक्ष पर तंज कसते हुए पूछा कि 40 साल बाद पानी का मुद्दा उठा, तो वे कहाँ थे? उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने पानी के संरक्षण के लिए कदम उठाए हैं।

