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इस बार की फेस्टिवल शॉपिंग में GST ने लगाई रफ्तार, मेट्रो और टियर 2-3 शहरों में बढ़ी खरीदारी

 GST का जादू: इस त्योहारी सीज़न में खरीदारी हुई सस्ती और शानदार!-इस साल दिवाली और नवरात्रि जैसे त्योहारों पर खरीदारी का माहौल कुछ अलग ही रहा। लोग सिर्फ़ ऑफर्स और डिस्काउंट ही नहीं देख रहे, बल्कि कुछ खास और बेहतर खरीदना चाह रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) में हुए कुछ अहम बदलाव, जिन्होंने आम आदमी की जेब पर सीधा असर डाला है। चलिए, जानते हैं कैसे GST के इन नए नियमों ने इस त्योहारी सीज़न को और भी खास बना दिया है।

 GST के नए रंग: इलेक्ट्रॉनिक्स और फर्नीचर हुए सबके लिए,-22 सितंबर से नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही GST 2.0 के नए नियम लागू हुए, और इसका सबसे बड़ा फायदा दिखा इलेक्ट्रॉनिक्स और फर्नीचर के बाज़ार में। बड़े-बड़े टीवी, फैशनेबल कपड़े और घर को सजाने वाले फर्नीचर की कीमतें अचानक कम हो गईं। पहले जहाँ इन चीज़ों पर ज़्यादा टैक्स लगता था, वहीं अब GST की दरें कम होने से ये आम लोगों की पहुँच में आ गए हैं। उदाहरण के लिए, बड़े स्क्रीन वाले टीवी पर GST 28% से घटकर 18% कर दिया गया। इसका मतलब है कि अब आप वही टीवी 6-8% सस्ता खरीद सकते हैं! इसी तरह, 2,500 रुपये से कम कीमत वाले कपड़ों पर GST सिर्फ़ 5% कर दिया गया है, जिससे मिड-रेंज कपड़ों की बिक्री में ज़बरदस्त उछाल आया है। फर्नीचर पर भी GST की दरें कम होने से लोग अब बेझिझक सोफे, डाइनिंग टेबल जैसी चीज़ें खरीद रहे हैं। इस बदलाव का असर सीधा बिक्री पर दिखा, जहाँ पिछले साल की तुलना में इस साल पहले दो दिनों में ही बिक्री 23-25% तक बढ़ गई। ये पिछले साल के मुकाबले चार-पाँच गुना ज़्यादा है! यानी, GST के इन बदलावों ने न सिर्फ़ चीज़ों को सस्ता किया, बल्कि लोगों को दिल खोलकर खरीदारी करने का मौका भी दिया।

 ऑनलाइन शॉपिंग का नया दौर: प्रीमियम प्रोडक्ट्स की बढ़ी डिमांड-इस त्योहारी सीज़न में ऑनलाइन शॉपिंग का नज़ारा भी कुछ बदला-बदला सा रहा। ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर लोगों ने सिर्फ़ रोज़मर्रा की चीज़ें ही नहीं, बल्कि प्रीमियम और थोड़ी महंगी चीज़ों की खरीदारी भी खूब की। Amazon और Flipkart जैसी बड़ी कंपनियों ने बताया कि उनके प्लेटफ़ॉर्म पर लाखों लोग पहुँचे, और इनमें से ज़्यादातर लोग छोटे शहरों, यानी टियर 2 और टियर 3 शहरों से थे। इसका मतलब है कि अब सिर्फ़ बड़े शहरों के लोग ही नहीं, बल्कि छोटे शहरों के लोग भी अच्छी क्वालिटी और प्रीमियम प्रोडक्ट्स खरीदने में दिलचस्पी ले रहे हैं।स्मार्टफोन, बड़े टीवी, और दूसरे महंगे इलेक्ट्रॉनिक्स की डिमांड सबसे ज़्यादा रही। Amazon ने बताया कि उनके प्लेटफ़ॉर्म पर 16,000 से ज़्यादा छोटे और मध्यम व्यापारियों (SMBs) ने अपनी आम बिक्री से तीन गुना ज़्यादा की बिक्री की। यह दिखाता है कि GST के बदलावों का फायदा छोटे व्यापारियों तक भी पहुँचा है और वे भी अब ऑनलाइन दुनिया में अपनी जगह बना पा रहे हैं। Flipkart ने भी अपनी शुरुआती 48 घंटे की सेल में 21% की बढ़ोतरी दर्ज की, जिसमें मोबाइल और टीवी की बिक्री में तो 26% तक का उछाल देखा गया। Snapdeal पर भी फैशन और गिफ्टिंग आइटम्स की बिक्री में भारी इज़ाफ़ा हुआ। CEO अचिंत सेतिया ने कहा कि GST दरों में कमी और फेस्टिव ऑफर्स के मेल ने ग्राहकों को और भी ज़्यादा उत्साहित किया है। कुल मिलाकर, ऑनलाइन शॉपिंग अब सिर्फ़ सुविधा के लिए नहीं, बल्कि बेहतर डील्स और क्वालिटी प्रोडक्ट्स पाने का ज़रिया बन गई है।

भरोसा बढ़ा, खर्च बढ़ा: आम आदमी की बदली सोच-इस साल त्योहारों की खरीदारी में सिर्फ़ डिस्काउंट का खेल नहीं चला, बल्कि लोगों का भरोसा और खर्च करने की आदत भी बदली। GST के सुधारों ने महँगी चीज़ों को सस्ता बनाया, जिससे लोग अब सिर्फ़ ज़रूरत की चीज़ें ही नहीं, बल्कि अपनी पसंद और ख्वाहिशों की चीज़ें भी खरीद पा रहे हैं। छोटे शहरों से खरीदारी का बढ़ना इस बात का सबूत है कि अब देश के हर कोने में लोगों के पास खर्च करने के लिए ज़्यादा पैसे हैं और वे उन्हें बेहतर चीज़ों पर लगाना चाहते हैं।यह भी देखा गया कि ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट्स पर इतनी ज़्यादा भीड़ हो गई कि कभी-कभी वे धीमी भी पड़ गईं या क्रैश भी हुईं। यह दिखाता है कि लोग कितनी बेसब्री से डील्स का इंतज़ार कर रहे थे और जल्दी से जल्दी खरीदारी करना चाहते थे। इस साल की त्योहारी खरीदारी सिर्फ़ पैसे बचाने की नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों में बदलाव, लोगों के बढ़ते आत्मविश्वास और प्रीमियम प्रोडक्ट्स की तरफ़ झुकाव का एक मिला-जुला असर है। छोटे और मध्यम व्यापारियों, स्थानीय कारीगरों और ‘मेड-इन-इंडिया’ ब्रांड्स के लिए भी यह एक बहुत अच्छा मौका साबित हुआ है। कुल मिलाकर, इस साल की त्योहारों की खरीदारी ने यह साबित कर दिया है कि GST, उत्सव का माहौल और डिजिटल प्लेटफॉर्म मिलकर लोगों के खरीदारी करने के तरीके को पूरी तरह से बदल रहे हैं।

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