सेहत

कैंसर का कारण सिर्फ तंबाकू-शराब नहीं, शरीर के ये 5 इन्फेक्शन भी बढ़ा सकते हैं खतरा

नई दिल्ली : कैंसर का नाम आते ही आमतौर पर तंबाकू, शराब, खराब जीवनशैली और आनुवंशिक कारणों का ध्यान आता है। लेकिन कुछ ऐसे वायरस और बैक्टीरिया भी हैं, जो लंबे समय तक शरीर में मौजूद रहने पर कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। हालिया वैश्विक आंकड़ों के मुताबिक, कैंसर के मामलों का एक बड़ा हिस्सा संक्रमण से जुड़ा हुआ है।

दंतेवाड़ा के किरंदुल में ‘दक्ष: एडवांस्ड डिजिटल स्किलिंग प्रोजेक्ट फॉर यूथ’ का भव्य शुभारंभ, युवाओं को मिलेगा मुफ्त कंप्यूटर प्रशिक्षण

लाखों कैंसर मामलों के पीछे इन्फेक्शन

इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में दुनियाभर में करीब 23 लाख नए कैंसर मामले ऐसे थे, जिनका संबंध संक्रमण से पाया गया। यह कुल कैंसर मामलों का लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा है।

रिसर्च में ऐसे 12 संक्रामक एजेंट्स की पहचान की गई है, जिन्हें कैंसर के संभावित कारणों से जोड़ा गया है। इनमें पांच प्रमुख संक्रमण सबसे अधिक मामलों से जुड़े पाए गए।

ये 5 इन्फेक्शन बढ़ा सकते हैं कैंसर का जोखिम

1. एच. पाइलोरी (H. pylori)
यह एक बैक्टीरिया है, जो मुख्य रूप से पेट में संक्रमण पैदा करता है। लंबे समय तक रहने वाला यह संक्रमण पेट में सूजन और अन्य बदलावों के जरिए पेट के कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है। इससे करीब 7.6 लाख कैंसर मामलों का संबंध पाया गया।

2. एचपीवी (HPV)
ह्यूमन पैपिलोमावायरस को सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण माना जाता है। इसके अलावा यह कुछ अन्य जननांग और सिर-गर्दन से जुड़े कैंसर के जोखिम से भी संबंधित है। करीब 7.5 लाख कैंसर मामले इससे जुड़े पाए गए।

3. हेपेटाइटिस बी (HBV)
हेपेटाइटिस बी वायरस लंबे समय तक शरीर में रहने पर लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है और लिवर कैंसर का जोखिम बढ़ा सकता है। आंकड़ों में करीब 3.6 लाख कैंसर मामलों का संबंध इससे पाया गया।

4. एपस्टीन-बार वायरस (EBV)
यह वायरस कुछ प्रकार के लिंफोमा और अन्य कैंसर से जुड़ा हुआ है। इसके कारण करीब 2.6 लाख कैंसर मामले सामने आने का अनुमान है।

5. हेपेटाइटिस सी (HCV)
हेपेटाइटिस सी का सबसे गंभीर असर लिवर पर पड़ सकता है। लंबे समय तक रहने वाला संक्रमण लिवर कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है। करीब 1.6 लाख कैंसर मामलों को इससे जोड़ा गया है।

इन्फेक्शन से कैंसर का खतरा कैसे बढ़ता है?

हर संक्रमण कैंसर का कारण नहीं बनता। जोखिम मुख्य रूप से संक्रमण के प्रकार, उसके लंबे समय तक बने रहने और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है।

कुछ संक्रमण लंबे समय तक शरीर में बने रहते हैं और लगातार सूजन पैदा कर सकते हैं। लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन और कोशिकाओं में होने वाले बदलाव कैंसर के विकास की प्रक्रिया में भूमिका निभा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, हेपेटाइटिस वायरस लंबे समय तक लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जबकि एच. पाइलोरी पेट में लगातार सूजन से जुड़ा हुआ है।

IND vs PAK Cricket Final: भारत-पाकिस्तान की गोल्ड मेडल के लिए भिड़ंत, जानें कब और कितने बजे होगा मुकाबला

कम और मध्यम आय वाले देशों में ज्यादा बोझ

आंकड़ों के मुताबिक, संक्रमण से जुड़े कैंसर का करीब 77 प्रतिशत बोझ कम और मध्यम आय वाले देशों में है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका संबंध स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता, समय पर जांच, टीकाकरण और संक्रमण के इलाज तक पहुंच से हो सकता है।

बचाव के लिए क्या करें?

संक्रमण से जुड़े कई कैंसर को रोकने या उनका जोखिम कम करने के तरीके उपलब्ध हैं।

एचपीवी और हेपेटाइटिस बी की वैक्सीन: इन दोनों संक्रमणों से बचाव के लिए प्रभावी टीके उपलब्ध हैं। टीकाकरण संक्रमण और उससे जुड़े कुछ कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

समय पर इलाज: हेपेटाइटिस सी के लिए वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, लेकिन आधुनिक एंटीवायरल उपचार से इस संक्रमण को ठीक किया जा सकता है।

नियमित जांच: जोखिम वाले संक्रमणों की समय पर पहचान और आवश्यक स्क्रीनिंग से बीमारी को शुरुआती स्तर पर पकड़ने में मदद मिल सकती है।

कुल मिलाकर, कैंसर की रोकथाम में सिर्फ तंबाकू और शराब से दूरी बनाना ही महत्वपूर्ण नहीं है। कुछ संक्रमणों से बचाव, टीकाकरण, समय पर जांच और सही उपचार भी कैंसर के जोखिम को कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

News Desk

सटीकता, निष्पक्षता और जिम्मेदार पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्ध, हमारे रिपोर्टर जमीनी स्तर से महत्वपूर्ण खबरों को जुटाकर तथ्यों की पुष्टि के साथ पाठकों तक पहुँचाने का कार्य करते हैं। PratidinRajdhani.in के माध्यम से वे समाज, शहर और देश से जुड़ी प्रमुख घटनाओं एवं जनहित के मुद्दों को विश्वसनीय और तथ्यपरक तरीके से प्रस्तुत करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।
Back to top button
📰 E-Paper