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राजधानी

Special report: चर्चा में…! सुस्त निगाहें खामोशियां और अजीब सी बेचैनी…

रायपुर । छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र 2024 आज से आरंभ हो गया। सदन में पहले दिन की कार्रवाई काफी शांतिपूर्ण रही। राज्यपाल के अभी भाषण के दौरान विपक्ष की कार्यशैली एग्रेसिव नहीं थी रवैया शांतिपूर्ण था। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अवश्य कुछ एक टिप्पणियां अभिभाषण पर थी लेकिन नहीं लगा कि उनकी शारीरिक भाषा के अनुरूप आवाज है। शायद अंग्रेजी में राज्यपाल का अभिभाषण होने का भी असर था। वहीं यह लगा की 2024 की तैयारी में ध्यान है। सत्ता पक्ष काफी उत्साहित था बजट सत्र में राज्यपाल महोदय की अभी भाषण में कई बार मेज थपथपा कर समर्थन दिया गया यह परंपरा रही है। सत्ता पक्ष राज्यपाल के अभिभाषण का समर्थन करता है। पूर्ववर्ती सरकार में भी राज्यपाल के अभिभाषण में मेज थपथपाकर समर्थन दिया जाता रहा कोई अंतर नहीं है, लेकिन पूर्ववर्ती सरकार के दौरान विपक्ष के सदस्य जिस तरह से अभिभाषण में टिप्पणियां करते रहे, टोका-टाकी करते रहे हैं वह शायद वर्तमान सरकार के दौरान विपक्ष के सदस्यों में पहले दिन नहीं दिखा संभावना रखते हैं कि आने वाले दिनों में विपक्ष हमलावर होगा। सवालों के साथ बातचीत तेज होगी, क्योंकि यह बजट सत्र है इसलिए सभी की निगाहें हैं। आने वाले दिनों में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। छत्तीसगढ़ की सरकार अवश्य बजट में लक्षण प्रेषित करेगी ऐसी पूरी उम्मीद प्रदेश की जनता कर रही है, करना भी चाहिए। नई सरकार बनने के बाद से कैबिनेट के फैसले ने आम लोगों को एक उम्मीद की किरण बिखेर दी है, शायद विपक्ष के कांग्रेसी सदस्य हो सकता है। इसी बात से परेशान हो पक्ष के विधायकों में उतावलापन है ।कई नए विधायक पहली बार सदन में पहुंचे हैं। परंपरा और नीति के अनुसार सदन की गरिमा को बनाए रखने के लिए संयमित है पर विपक्ष क्यों संयमित है यह प्रश्न चिन्ह है । कहीं यह लगता है कि राज्य विधानसभा चुनाव में अप्रत्याशित पराजय का विपक्षी सदस्यों पर अभी तक असर है । कुल मिलाकर सत्ता पक्ष और विपक्ष में तालमेल से सदन चलेगा यही परंपरा रही है, लेकिन आम लोगों को भरोसा है की जनहित के मुद्दे में विपक्ष अवश्य मजबूत होना चाहिए अन्यथा सरकार लापरवाह हो सकती है।
25 करोड़ का पैकेज
लोकसभा चुनाव को लेकर चर्चाओं के दौर में यह चर्चा भी काफी तेज है कि लोकसभा चुनाव लडऩा है तो 20 करोड़ का पैकेज तैयार कर लो तभी आप चुनाव में उपयुक्त कैंडिडेट साबित हो पाएंगे। लोकसभा और विधानसभा के निर्वाचन क्षेत्र में अंतर होता है जहां जितनी जीत बड़ी होती है वही उतनी बड़ी राशि होती है। टिकट पाने वालों ने पैकेज तैयार कर रहे हैं, जबकि कुछ ने हाथ खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि 20 करोड़ नहीं है ऐसे में यह सवाल भी एक महत्वपूर्ण हो जाता है। क्या चुनाव पैसे का है तो आम आदमी की इससे क्या आएगा, जबकि लोकसभा और विधानसभा में पहुंचने वाले जनप्रतिनिधि आम लोगों को उनके विकास का भरोसा देकर पहुंचते हैं।

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