
आर. वैशाली की धमाकेदार वापसी: ग्रैंड स्विस में लगातार दूसरी बार परचम लहराया!-भारतीय शतरंज की उभरती हुई सितारा, ग्रैंडमास्टर आर. वैशाली ने एक बार फिर अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है। उन्होंने FIDE ग्रैंड स्विस टूर्नामेंट में लगातार दूसरी बार खिताबी जीत दर्ज की है, जो वाकई काबिले तारीफ है। यह जीत उनके लिए सिर्फ एक और ट्रॉफी नहीं, बल्कि एक बड़ी वापसी का प्रतीक है, खासकर उस दौर के बाद जब उन्हें उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिल रहे थे। वैशाली ने खुद बताया कि पिछले साल की तरह इस साल भी उन्होंने जमकर मेहनत की, लेकिन कई बार नतीजे उनके पक्ष में नहीं गए। ऐसे में, इस बार की जीत उनके आत्मविश्वास को सातवें आसमान पर ले जाने वाली है। इस जीत से उन्हें न केवल 40,000 अमेरिकी डॉलर की इनामी राशि मिली है, बल्कि अगले साल होने वाले प्रतिष्ठित महिला कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में खेलने का सुनहरा अवसर भी प्राप्त हुआ है। यह उनके करियर का एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।
2023 की जीत और इस साल की जीत में क्या है खास?-जब वैशाली से पूछा गया कि 2023 की जीत और अब की जीत में उन्हें क्या अंतर महसूस हुआ, तो उन्होंने बड़े ही सहज भाव से बताया कि दोनों ही जीतें उनके लिए बेहद अनमोल हैं। 2023 की जीत उनके लिए इसलिए खास थी क्योंकि वह एक लंबे समय से चले आ रहे निराशाजनक प्रदर्शन के दौर के बाद आई थी, और इसने उन्हें सही समय पर एक नई ऊर्जा दी थी। वहीं, इस साल की जीत का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि लगातार मेहनत के बावजूद परिणाम उनके मन मुताबिक नहीं थे। ऐसे कठिन समय में मिली यह जीत उनके आत्मबल को मजबूत करने के लिए अत्यंत आवश्यक थी। वैशाली ने यह भी स्वीकार किया कि पिछले दो सालों में कई कड़े टूर्नामेंटों में खेलना और कुछ लगातार हार का सामना करना, उन्हें एक बेहतर खिलाड़ी और एक मजबूत इंसान बनाने में सहायक सिद्ध हुआ है। इन अनुभवों ने उन्हें सिखाया है कि कैसे दबाव में भी शांत रहकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है।
कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में भारत का बढ़ता दबदबा-इस शानदार जीत के साथ ही आर. वैशाली भारत की तीसरी ऐसी खिलाड़ी बन गई हैं जिन्होंने कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए अपना स्थान पक्का किया है। उनसे पहले, भारत की दो अन्य प्रतिभाशाली खिलाड़ी, दिव्या देशमुख और कोनेरू हम्पी, भी इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई कर चुकी हैं। कैंडिडेट्स टूर्नामेंट का यह आयोजन अगले वर्ष होने वाली महिला विश्व चैंपियनशिप के लिए दावेदारी पेश करने का एक महत्वपूर्ण मंच होगा, जहाँ वैशाली जैसी खिलाड़ी दुनिया की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को चुनौती देंगी। विशेष रूप से, उन्हें चीन की मौजूदा विश्व चैंपियन वेंजुन जू से मुकाबला करने का मौका मिलेगा, जो अपने आप में एक बड़ी चुनौती होगी। भारत से तीन खिलाड़ियों का एक साथ कैंडिडेट्स में होना, देश में महिला शतरंज के बढ़ते कद और प्रतिभा को दर्शाता है।
मुश्किलों से पार पाकर हासिल की यह ऐतिहासिक जीत-इस साल की शुरुआत वैशाली के लिए कुछ खास अच्छी नहीं रही थी। चेन्नई ग्रैंड मास्टर्स में, नौ राउंड के कड़े मुकाबले के बाद भी वह केवल डेढ़ अंक ही जुटा पाईं। इसके बाद वर्ल्ड कप में भी उन्हें चीन की मजबूत खिलाड़ी टैन झोंगयी से क्वार्टर फाइनल में हार का सामना करना पड़ा। इन नतीजों से पहले नॉर्वे टूर्नामेंट में पांचवां स्थान हासिल करना भी उनके लिए संतोषजनक नहीं था। इन लगातार झटकों के बाद, वैशाली ने हार को खुद पर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने खुद को संभाला और अगली गेम में ड्रॉ खेलकर अपने प्रदर्शन को स्थिर किया। यही मानसिक दृढ़ता और हार न मानने वाला जज्बा उन्हें ग्रैंड स्विस की यह महत्वपूर्ण ट्रॉफी दिलाने में सबसे बड़ा मददगार साबित हुआ। यह दिखाता है कि असली चैंपियन वही होता है जो मुश्किल वक्त में भी उम्मीद नहीं छोड़ता।
कैंडिडेट्स टूर्नामेंट की तैयारी और आगे की राह-महिला कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में कुल आठ खिलाड़ी हिस्सा लेंगी, और सभी अपनी-अपनी जगह पक्की करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं। वैशाली, दिव्या देशमुख और कोनेरू हम्पी के अलावा, चीन की जिनर झू और झोंगयी टैन, तथा रूस की अलेक्सांद्रा गोर्याचकिना और कतरीना लागनो जैसे दिग्गज खिलाड़ी भी इसमें शामिल हैं। आखिरी स्थान के लिए चयन प्रक्रिया अभी जारी है और जल्द ही इसका फैसला हो जाएगा। वैशाली की यह जीत न केवल उनके व्यक्तिगत करियर के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह पूरे भारतीय महिला शतरंज समुदाय के लिए प्रेरणा का एक अटूट स्रोत बन गई है। यह जीत युवा खिलाड़ियों को भी प्रोत्साहित करेगी कि वे भी कड़ी मेहनत और लगन से अपने सपनों को साकार कर सकते हैं।

