
विटामिन C का खजाना आमड़ा, स्वाद के साथ सेहत का भी भरोसेमंद साथी
आमड़ा जिसे वैज्ञानिक भाषा में स्पोंडियास पिन्नाटा कहा जाता है विटामिन C का एक बेहतरीन प्राकृतिक स्रोत है। आंवले के बाद आमड़ा को विटामिन C का सबसे अच्छा देसी विकल्प माना जाता है। इसका खट्टा-मीठा स्वाद जितना लाजवाब होता है उतना ही यह सेहत के लिए भी फायदेमंद है। यह पाचन सुधारता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है त्वचा को निखारता है और शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!भारतीय रसोई में आमड़ा का खास स्थान रहा है। इसकी चटनी, अचार और सब्जी घरों में बड़े चाव से बनाई जाती है। खासकर गर्मियों में आमड़ा से बनी चटनी स्वाद और ठंडक दोनों देती है।
बिहार सरकार का वन एवं पर्यावरण विभाग आमड़ा को प्रकृति का अनमोल उपहार बताते हुए इसके गुणों और महत्व पर लगातार जानकारी साझा करता रहता है। आमड़ा का पेड़ मध्यम आकार का होता है और धीरे-धीरे बढ़ता है। यह भारत के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में आसानी से पाया जाता है। बिहार के ग्रामीण इलाकों में यह पेड़ घरों और खेतों के आसपास आम तौर पर देखने को मिल जाता है।
आमड़ा के फल छोटे, गोल और हरे-पीले रंग के होते हैं। इनका स्वाद खट्टा-मीठा होता है। इनमें विटामिन C के अलावा आयरन, कैल्शियम, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यही वजह है कि आमड़ा को पाचन सुधारने, इम्युनिटी बढ़ाने और शरीर को डिटॉक्स करने वाला फल माना जाता है
आयुर्वेद में भी आमड़ा का खास महत्व है। इसके फल, पत्तियां, छाल और बीज का इस्तेमाल कई घरेलू नुस्खों में किया जाता है। यह कब्ज दूर करने, भूख बढ़ाने, त्वचा रोगों में राहत देने और शरीर की सूजन कम करने में मदद करता है।
आमड़ा में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं, जिससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम होता है।
आमड़ा का मौसम मुख्य रूप से गर्मियों में होता है लेकिन इसका अचार साल भर खाया जाता है। यही वजह है कि आमड़ा स्वाद और सेहत दोनों का भरोसेमंद देसी साथी माना जाता है

