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टेक्नोलॉजी

अब बिना चीर-फाड़ सीख सकेंगे सर्जरी! AI समिट में छाया एरा यूनिवर्सिटी का VR मॉडल, बदल जाएगी मेडिकल की पढ़ाई

VR in Medical Education: क्या आपने कभी सोचा कि एक मेडिकल छात्र बिना किसी असली ऑपरेशन थिएटर में जाए ही एक हार्ट सर्जरी की प्रैक्टिस कर रहा है. लेकिन उसे खून की एक बूंद गिरने का अहसास भी नहीं हो रहा और दिल की धड़कनें भी सुनाई दे रही हैं. यह कोई साइंस-फिक्शन फिल्म का सीन नहीं है. भारत में इसको सच कर के दिखाया गया है. यह मेडिकल एजुकेशन के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम है. प्रगति मैदान के भारत मंडपम में चल रहे ‘India AI Impact Summit 2026’ में लखनऊ की एरा यूनिवर्सिटी (Era University) ने अपने इस क्रांतिकारी वर्चुअल रियलिटी (VR) वाले मेडिकल मॉडल से पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा है.एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह शिक्षा के गेमिफिकेशन की शुरुआत है.इससे डॉक्टरों को तैयार करने के पुराने तरीके को हमेशा के लिए बदल दिया जाएगा.

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VR बॉक्स पहनते ही सामने होगा डिजिटल हॉस्पिटल
एरा यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित यह मॉडल एआई और वर्चुअल रियलिटी का एक बेजोड़ मेल है. इसमें छात्र एक वीआर हेडसेट पहनते हैं और अचानक खुद को एक डिजिटल अस्पताल के अंदर पाते हैं. इसमें छात्र को ऐसे ही परिस्थितियों का सामना होता है जैसा वो असली इमरजेंसी वार्ड में करते है. इसमें छात्र वर्चुअल पेशेंट का इलाज करते हैं. अगर वे कोई गलत कट लगाते हैं या गलत दवा देते हैं, तो एआई सिस्टम तुरंत उन्हें इसके परिणामों के बारे में बता देता है. मेडिकल की दुनिया में इंसान की शरीर पर प्रैक्टिस करने की अपनी सीमाएं होती हैं, लेकिन इस वीआर मॉडल में छात्र एक ही प्रक्रिया का सैकड़ों बार अभ्यास कर सकते हैं.

AI समिट में क्यों चर्चा में है यह मॉडल?
समिट में इस प्रोजेक्ट को फ्यूचर ऑफ हेल्थकेयर एजुकेशन के रूप में पेश किया गया है. आईटी सचिव और समिट में आए एक्सपर्ट्स ने इसकी तारीफ करते हुए कहा कि यह टेक्नोलॉजी न केवल छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ाएगी, बल्कि आने वाले समय में सर्जिकल गलतियों (Surgical Errors) को भी कम करेगी. AI एक्सपो के एरा यूनिवर्सिटी के पवेलियन में मौजूद छात्रों का कहना है कि यह किसी गेम जैसा होता है. जहां आप अलग-अलग लेवल पार सकते है, और अपनी स्किल्स को अपडेट करते हैं. इससे पढ़ाई बोझिल नहीं लगती और छात्र ज्यादा दिलचस्पी के साथ हार्ड सब्जेक्ट को भी समझ पाता है.

आम आदमी को क्या होगा फायदा?
आप सोच रहे होंगे कि इससे आम जनता को क्या मिलेगा? दरअसल, जब छात्र वीआर के जरिए ज्यादा कुशल और अनुभवी डॉक्टर बनेंगे, तो जमीन पर इलाज की क्वालिटी में सुधार होगा. ग्रामीण इलाकों के मेडिकल कॉलेजों में जहां संसाधनों की कमी होती है, वहां यह वीआर मॉडल एक डिजिटल लैब का काम करेगा.

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