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राजनीति

UP विधानसभा चुनाव: 2027 में फिर गठबंधन करेगी सपा और कांग्रेस, अखिलेश कर रहे मंथन

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में मजबूत प्रत्याशी उतारकर सटीक जातिगत समीकरण साधने में सफल रहे सपा मुखिया अखिलेश यादव मिशन-2027 की तैयारी भी उसी तर्ज पर कर रहे हैं। सपा ने न सिर्फ अपनी पार्टी के मजबूत दावेदारों की तलाश शुरू की है, बल्कि गठबंधन सहयोगी कांग्रेस के साथ मिलकर भी इस रणनीति पर काम आगे बढ़ा दिया है।

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कांग्रेस ने अपनी ओर से भी अपने नेटवर्क से यह रिपोर्ट तैयार कर सपा के साथ साझा की है कि उत्तर प्रदेश के किस विधानसभा क्षेत्र में किस जाति का प्रभाव अधिक है और उस जाति-वर्ग से कांग्रेस के कोटे से कौन-कौन मजबूत दावेदार हो सकते हैं।

सपा-कांग्रेस बना रही ब्लूप्रिंट

विपक्षी गठबंधन जातिगत समीकरण के इसी ब्लूप्रिंट के आधार पर अपनी चुनावी बिसात बिछाने की तैयारी में है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस, दोनों ही दलों की ओर से कई बार स्पष्ट किया जा चुका है कि लोकसभा चुनाव 2024 की तरह ही आगामी विधानसभा चुनाव में भी उनका गठबंधन जारी रहेगा। खास तौर पर दोनों दलों का शीर्ष नेतृत्व भाजपा का विजय रथ रोकने के लिए इस गठबंधन को बहुत आवश्यक मान रहा है।

दोनों दल इसलिए भी उत्साहित हैं, क्योंकि लोकसभा चुनाव में वह मिलकर भाजपा को पीछे धकेलने में कामयाब रहे। न सिर्फ यह विपक्षी दल, बल्कि राजनीतिक जानकार भी मानते हैं कि पिछड़ा, दलित अल्पसंख्यक (पीडीए) का नारा बुलंद करते हुए जिस तरह से अखिलेश यादव ने लोकसभा सीट के हिसाब से प्रत्याशियों के माध्यम से जातिगत समीकरण साधे, उसने भाजपा की मुट्ठी से 29 सीटें छीन लीं और वह सपा की 37 के मुकाबले मात्र 33 पर सिमट गई।

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जातिगत समीकरण साधने में जुटी पार्टी

वहीं, सपा के सहारे कांग्रेस को भी बढ़त मिली और उसकी सीटें एक से बढ़कर छह हो गईं। इस परिणाम से सपा-कांग्रेस जहां उत्साहित हैं, वहीं बिहार चुनाव परिणामों से सतर्क भी हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि दोनों परिणामों को देखते हुए ही अब विपक्ष की तैयारी चल रही है।

अव्वल तो भाजपा प्रत्याशियों के सामने जातिगत प्रभाव का आकलन करते हुए मजबूत दावेदार उतारने की रणनीति है। इसके लिए सपा-कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत हुई। सपा ने अपनी तैयारी बताते हुए कांग्रेस से भी फीडबैक रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा।

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कांग्रेस कर रही मंथन

इसके बाद कांग्रेस नेतृत्व ने अपने प्रदेश संगठन, जिलों के नेटवर्क व समाज के प्रबुद्धजन आदि से संपर्क कर यह आकलन करने का प्रयास किया है कि किस विधानसभा सीट पर किस जाति का प्रत्याशी उतारा जाना चाहिए। साथ ही बेहतर उम्मीदवार कौन हो सकता है।

सूत्रों के अनुसार, बीते दिनों नई दिल्ली में यह रिपोर्ट दोनों दलों के नेतृत्व ने साझा कर ली है। वहीं, बिहार चुनाव में विपक्षी गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच गड़बड़ाए तालमेल को करारी हार का एक प्रमुख कारण मानते हुए भी सपा और कांग्रेस चाहते हैं कि अभी सीटों के बंटवारे के झंझट में न फंसते हुए सिर्फ मजबूत प्रत्याशियों की तलाश पर फोकस किया जाए। तालेमल बेहतर रहे, इसलिए राष्ट्रीय नेतृत्व ही फिलहाल आपस में बातचीत कर रहा है।

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