
नए भारत की एमएसएमई क्रांति के केंद्र में है नारी शक्ति : शोभा करंदलाजे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा और विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने वाले नारी शक्ति वंदन अधिनियम का सितंबर 2023 में संसद में समर्थन करते हुए विश्वास व्यक्त किया था कि भारत तभी आगे बढ़ सकता जब देश की नारियां भी इसके साथ ही उन्नति करें। उनका यह विश्वास एमएसएमई क्षेत्र (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) में सरकार के काम में हर रोज दिखाई देता है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!एमएसएमई क्षेत्र को अक्सर भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी कहा जाता है। लेकिन अगर गहराई से देखें तो इसके दिल में महिला उद्यमियों का मूक बल बसता है। आखिरकार आज इस मूक बल को वह राष्ट्रीय मान्यता, संस्थागत समर्थन और नीतिगत गति मिल रही है जिसका वह हमेशा से हकदार है।
आँकड़े बयां करते हैं कहानी
भारत के एमएसएमई इकोसिस्टम में महिलाओं की भागीदारी का दायरा लगातार बढ़ रहा है। 2026 की शुरुआत तक, ‘उद्यम पंजीकरण पोर्टल’ और ‘उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म’ पर 3.11 करोड़ से अधिक महिला-नेतृत्व वाले उद्यम पंजीकृत हुए हैं। वास्तव में, ‘उद्यम’ और ‘उद्यम असिस्ट’ पंजीकरण के अनुसार, देश के कुल पंजीकृत एमएसएमई में महिला-स्वामित्व वाले उद्यमों की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है और ये रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। महिला उद्यमियों के लिए सबसे प्रभावशाली सुधारों में से एक ‘उद्यम पंजीकरण पोर्टल’ के माध्यम से पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाना है। पूरी तरह से ऑनलाइन, कागज रहित और स्व-घोषणा पर आधारित इस व्यवस्था ने उस नौकरशाही बाधा को समाप्त कर दिया, जो महिलाओं के लिए एक बड़ी रुकावट बनी हुई थी। जनवरी 2023 में शुरू किए गए ‘उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म’ ने अनौपचारिक क्षेत्रों में कार्यरत उन महिलाओं तक पहुँच बनाकर इस दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया, जिनके पास ‘पैन’ नंबर या ‘जीएसटीएन’ नहीं था। इसने उन्हें प्राथमिकता क्षेत्र में दिए जाने वाले ऋण और सरकारी योजनाओं के लाभों के दायरे में लाने का काम किया।
सरकार ने महिलाओं को विकास वाहक के रूप में अपने आर्थिक एजेंडे के केंद्र में रखने का निर्णय लिया है।
आर्थिक शक्ति के रूप में ‘नारी शक्ति’
प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार इस बात पर ज़ोर दिया है कि महिलाओं को सशक्त बनाना केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय रणनीति है। उन्होंने ही कहा था कि जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तो परिवार सशक्त होते हैं और जब परिवार सशक्त होते हैं, तो राष्ट्र निरंतर मज़बूत होता जाता है।
‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ राजनीतिक क्षेत्र में इस दर्शन की सबसे स्पष्ट अभिव्यक्ति है। लेकिन आर्थिक क्षेत्र में, विशेष रूप से एमएसएमई क्षेत्र में महिलाओं के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता एक व्यापक और बहुआयामी नीतिगत ढांचे के रूप में सामने आई है, जो ऋण, कौशल, बाज़ार तक पहुंच, पहचान और गरिमा जैसे पहलुओं को समाहित करती है।
महिलाओं के लिए तैयार की गई एक नीतिगत संरचना

