
गर्मियों में पेट की परेशानियों से राहत: बेल हो सकता है आपका आयुर्वेदिक उपाय
गर्मियों का मौसम आते ही, कई लोगों को पेट से जुड़ी परेशानियां सताने लगती हैं। ज़्यादा तापमान और नमी के कारण आंतों में दिक्कतें पैदा हो जाती हैं। पतंजलि आयुर्वेद के सह-संस्थापक, योग गुरु स्वामी रामदेव, इन समस्याओं के इलाज के लिए ‘बेल’ और अन्य चीज़ों को बहुत फायदेमंद बताते हैं। स्वामी रामदेव कहते हैं, “माना जाता है कि बेल का फल भगवान शिव को बहुत प्रिय है। यह खाने में बहुत स्वादिष्ट और असरदार होता है। चाहे कब्ज़ हो, कोलाइटिस हो, या पेट से जुड़ी कोई और समस्या हो, यह एक बेजोड़ और अचूक उपाय का काम करता है। गर्मियों में बेल को घर ज़रूर लाएं और इसका सेवन करें।”गर्मियों में पेट से जुड़ी समस्याएं भारतीय गर्मियों में पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाती हैं, जैसे कि एसिडिटी, अपच, डिहाइड्रेशन (पानी की कमी), फ़ूड पॉइज़निंग और कोलाइटिस। बढ़ती गर्मी के कारण पसीना आता है और शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिससे जी मिचलाना, कब्ज़ और पेट में ऐंठन जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। गर्मी और मसालेदार खाना, दोनों मिलकर अपच और तेज़ एसिडिटी की समस्या पैदा करते हैं। कई लोगों को कब्ज़ की शिकायत हो जाती है, क्योंकि इस मौसम में बड़ी आंत (कोलन) मल से ज़्यादा पानी सोख लेती है। दूषित खाना या पानी पीने से पेचिश या दस्त की समस्या हो सकती है। बार-बार सफ़र करना, गलत खान-पान और यहाँ तक कि तनाव भी इन परेशानियों को और बढ़ा देता है।à 5 आसान एक्सरसाइज आयुर्वेद के अनुसार, गर्मियों का मौसम ‘पित्त’ का मौसम होता है, जिसमें शरीर की ‘अग्नि’ (गर्मी) बढ़ जाती है। इसके कारण पाचन कमज़ोर हो जाता है, एसिडिटी होती है, शरीर में सूजन आ सकती है और ज़हरीले तत्व जमा होने लगते हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए, स्वामी रामदेव आयुर्वेदिक उपायों के साथ-साथ पतंजलि के संबंधित उत्पादों का भी सुझाव देते हैं। पेट से जुड़ी समस्याओं के लिए आयुर्वेदिक उपाय इस मौसम में बेल का फल खाने से पेट की समस्याओं का इलाज करने में मदद मिलती है। यह एक प्राकृतिक ‘कूलेंट’ (ठंडक देने वाला) है, जो शरीर की गर्मी को कम करता है और शरीर में पानी की मात्रा को बनाए रखता है। यह पेट से जुड़ी समस्याओं, जैसे कि संक्रमण, कब्ज़ और दस्त का इलाज करता है। स्वामी रामदेव, पतंजलि की स्वादिष्ट और प्राकृतिक रूप से मीठी ‘बेल कैंडी’ (250 ग्राम और 500 ग्राम) और ‘बेल का मुरब्बा’ (1 किलोग्राम) का सेवन करने की सलाह देते हैं। यह कैंडी अपच, दस्त, एसिडिटी और पेट की जलन जैसी समस्याओं को दूर करके पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करती है। बेल का मुरब्बा भी पाचन को बेहतर बनाता है और पेट की तकलीफ़ों को दूर करता है। ये दोनों ही चीज़ें रोग-प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को बढ़ाती हैं और लिवर को साफ़ करती हैं।
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