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क्या वाकई तरबूज में इंजेक्शन से डालते हैं रंग? FSSAI ने बताई सच्चाई

तरबूज गर्मियों का बेहतरीन फल है, लेकिन हाल ही में कुछ ऐसे मामले आए जिसमें तरबूज खाने के बाद तबीयत खराब होना और यहां तक कि मौत का मामला भी सामने आया था. भले ही इसके पीछे की वजह जो भी रही हो, लेकिन इसके बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जाने लगे जैसे तरबूज में इंजेक्शन से केमिकल वाला रंग डाला जाता है. फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) की तरफ से इसके पीछे की सच्चाई बताई गई है.

आपको कई इंफ्लुएंसर ये भी बताते दिख जाएंगे कि तरबूज को पानी में डालने से अगर पानी का रंग लाल हो जाता है तो इसका मतलब है उसमें इंजेक्शन से सिंथेटिक कलर डाला गया है. ऐसे ही मिथक के चलते लोग डर की वजह से तरबूज भी खाना बंद कर देते हैं. आप भी अगर इन बातों पर भरोसा करते हैं तो जान लेते हैं कि FSSAI का इस बारे में क्या कहना है.

तरबूज में इंजेक्शन से रंग डालना

अक्सर आपने सोशल मीडिया पर या अपने आसपास ये सुना होगा कि तरबूज को वाइब्रेंट रेड कलर देने के लिए उसमें डाई वाला लाल रंग वाला इंजेक्शन डाला जाता है. FSSAI के मुताबिक, ऐसा करना पॉसिबल नहीं है. दरअसल उनका कहना है कि जब आप तरबूज में इंजेक्शन से डाई वाला इंजेक्शन डालते हैं तो वो अंदर पूरी तरह से नहीं फैल सकता है. इससे उसमें वहीं पर डार्क रेड कलर के निशान या धब्बे बन जाएंगे जहां पर इंजेक्शन लगाया गया है.

खर्च ज्यादा होना भी है वजह

तरबूज के सीजन में इसकी पैदावार बहुत ज्यादा होती है और मार्केट में मांग भी रहती है. ऐसे में अगर आप तरबूज में इंजेक्शन से लाल रंग डालने की बात करते हैं तो ये लॉजिकली पॉसिबल नहीं है. दरअसल पहली बात कि इससे खर्च काफी बढ़ जाएगा. इतने बल्क में तरबूजों में इंजेक्शन लगाना भी पॉसिबल नहीं है. इससे लेबर भी ज्यादा लगानी पड़ेगी.

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तरबूज सड़ना शुरू हो जाएगा

तरबूज में इंजेक्शन लगाने की बात इसलिए भी पूरी तरह से सही नहीं है, क्योंकि जब आप तरबूज में सुई लगाएंगे तो उसके साथ ही तरबूज में अंदर बैक्टीरिया चले जाएंगे. इस वजह से तरबूज जल्दी सड़ना शुरू हो जाता है. इसका स्वाद खराब हो सकता है. इस तरह से तरबूज में इंजेक्शन के जरिए रंग डालने का दावा बिल्कुल भी सही नहीं है.

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