हंसते, छींकते या खांसते ही होने लगता है तेज सिरदर्द? भूलकर भी न करें नजरअंदाज, हो सकता है गंभीर बीमारी का संकेत

अक्सर लोग सिरदर्द को थकान, तनाव, नींद की कमी या मौसम में बदलाव का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर हंसने, रोने, छींकने, खांसने, झुकने या जोर लगाने के तुरंत बाद सिर में अचानक तेज दर्द होने लगे, तो इसे सामान्य समझने की गलती न करें। इस तरह का सिरदर्द कभी-कभी शरीर में किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है।
मेडिकल भाषा में इसे कफ हेडेक या एक्सर्शन हेडेक कहा जाता है। यह केवल खांसने से ही नहीं, बल्कि छींकने, जोर से हंसने, रोने, नाक साफ करने, भारी सामान उठाने और टॉयलेट में जोर लगाने के दौरान भी हो सकता है।
हर बार गंभीर बीमारी का संकेत नहीं
इस तरह के सिरदर्द के दो प्रकार होते हैं। पहला प्राइमरी कफ हेडेक है, जिसमें आमतौर पर कोई गंभीर अंदरूनी बीमारी नहीं होती। इसमें अचानक दर्द शुरू होता है और कुछ सेकंड या मिनटों में अपने आप ठीक भी हो सकता है।
दूसरा सेकेंडरी कफ हेडेक है, जो दिमाग से जुड़ी किसी अंदरूनी समस्या के कारण हो सकता है। इसकी संभावित वजहों में दिमाग में खून का रिसाव, रक्त वाहिकाओं में गड़बड़ी, किआरी मालफॉर्मेशन, ब्रेन ट्यूमर और दिमाग के तरल पदार्थ (सीएसएफ) से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं। हालांकि, हर मामले में इन बीमारियों की आशंका नहीं होती, लेकिन अचानक शुरू होने वाले नए सिरदर्द की जांच जरूरी है।
इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
अगर सिरदर्द अचानक बहुत तेज हो जाए और कुछ सेकंड से एक मिनट के भीतर अपने चरम पर पहुंच जाए, तो इसे थंडरक्लैप हेडेक कहा जाता है। यह दिमाग में ब्लीडिंग जैसी गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
इसके अलावा सिरदर्द के साथ नीचे दिए गए लक्षण दिखाई दें, तो भी देरी नहीं करनी चाहिए।
- बेहोशी आना या दौरे पड़ना
- भ्रम या उलझन महसूस होना
- बोलने में परेशानी होना
- हाथ-पैर में कमजोरी या सुन्नपन
- चलते समय लड़खड़ाहट होना
- धुंधला या दोहरा दिखाई देना
- गर्दन में अकड़न होना
- बार-बार उल्टी होना
कैसे होती है इसकी जांच?
इस तरह के सिरदर्द की जांच के दौरान सबसे पहले यह समझने की कोशिश की जाती है कि दर्द कब शुरू हुआ, कितनी तेजी से बढ़ा, कितनी देर तक रहा और क्या यह केवल खांसने, छींकने या जोर लगाने पर होता है।
जरूरत पड़ने पर सीटी स्कैन या एमआरआई जैसी जांच की जा सकती है। इनकी मदद से दिमाग में किसी तरह की गड़बड़ी या गंभीर बीमारी का पता लगाने में मदद मिलती है।
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कब हो जाना चाहिए सतर्क?
हंसते या छींकते समय कभी-कभार हल्का सिरदर्द होना हमेशा गंभीर चिंता की बात नहीं है। लेकिन अगर सिरदर्द पहली बार हुआ है, अचानक शुरू हुआ है या असहनीय है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर खांसने, छींकने और जोर लगाने पर बार-बार तेज दर्द होने की स्थिति में चिकित्सकीय जांच जरूर कराएं। समय पर जांच से सिरदर्द के पीछे छिपे कारणों का पता लगाया जा सकता है।

