
हरियाणा । संसार मे हम जो कुछ भी इन आँखों से देखते हैं अथवा अनुभव करते हैं वो सभी परिवर्तनशील हैं। इनमें से किसी भी शै को शाश्वत सच्चाई नहीं कहा जा सकता। वास्तविक सच्चाई तो ये ईश्वर निरंकार है जो कण कण में विद्यमान है जिसमें काल का कोई प्रभाव नहीं पड़ता । इस निरंतर एकरस रहने वाली सच्चाई को अपनाने से निसंदेह हम भ्रमों से मुक्ति पा सकते हैं। समालखा हरियाणा मे आयोजित तीन दिवसीय निरंकारी संत समागम के पावन अवसर पर सतगुरु माता सुदीक्षा जी ने लाखों की संखया मे उयस्थित हुए श्रद्धालुओं को अमृतमय वचनों से अनुग्रहित किया ।
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सतगुरु माता जी ने कहा कि हम अक्सर अपनी आदतों और विचारों तक सीमित रहते हैं, अपनी आदतों और कमजोरियों को पहचान कर उन्हे दूर करना विस्तार का रूप है। यदि हमारी सोच मे हम दूसरों के लाभ को सम्मिलित कर लेते हैं तो ये सच्चे विस्तार का प्रतीक होगी।
भक्ति साधन के साथ ही साध्य भी है। ब्रामहज्ञान द्वारा मनुष्य की सोच का विस्तार होता है, उसके बाद मानव की सोच सकारात्मक होती है प्रेम दया करुणा के भाव का हृदया मे जनम होता है फिर मनुष्य की सोच का विस्तार असीम की ओर होता है।
निरंकारी मिशन का 77वां वार्षिक संत समागम निरंकारी आध्यात्मिक स्थल हरियाणा मे सम्पन्न हुआ जिसमे सम्पूर्ण भारतवर्ष के भक्तों एवं विश्व के अनेक देशों से आए श्रधालुओं ने अपने सतगुरु के दर्शन किए और उनके श्रीमुख से निकले पावन उपदेशों का लाभ लिया।
