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बच्चों पर फोन की लत का असर और कैसे करें इसे कंट्रोल
Phone Addiction : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक बेहद दुखद खबर आई है, जहां एक छात्रा ने मोबाइल छीने जाने के बाद आत्महत्या कर ली। मृत छात्रा का नाम एंजल जैसवानी बताया जा रहा है। परिवार के अनुसार, एंजल काफी समय मोबाइल पर बिताती थी, जिससे उसकी पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा था। 15 दिसंबर को जब माता-पिता ने उसे पढ़ाई के लिए कहा और मोबाइल छीन लिया, तो वह नाराज हो गई। गुस्से में आकर उसने अपने कमरे में जाकर फांसी लगा ली।
मोबाइल की लत कैसे बना रही बच्चों को शिकार?
आजकल बच्चे मनोरंजन के लिए मोबाइल पर गेम्स, सोशल मीडिया और वीडियो देखने में घंटों बिता देते हैं। माता-पिता को भी लगता है कि मोबाइल से बच्चे व्यस्त रहते हैं और उन्हें आराम का समय मिल जाता है। लेकिन धीरे-धीरे यह आदत गंभीर समस्या बन जाती है। मोबाइल का अधिक इस्तेमाल बच्चों की पढ़ाई और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को कमजोर कर देता है। ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों में तनाव, चिंता और डिप्रेशन जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। किशोरों में यह प्रवृत्ति कभी-कभी अवसाद और आत्महत्या तक पहुंच जाती है।नींद और व्यवहार पर असर
रात में सोने से पहले अगर बच्चे मोबाइल पर गेम्स खेलते हैं या वीडियो देखते हैं, तो उनकी नींद प्रभावित होती है। इससे अगले दिन पढ़ाई और अन्य गतिविधियों में उनकी परफॉर्मेंस खराब हो जाती है। ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल करने वाले बच्चे अक्सर चिड़चिड़े और आक्रामक हो जाते हैं। इसके अलावा, यह आदत परिवार के साथ उनके रिश्तों पर भी असर डालती है और उनकी सोचने-समझने की क्षमता को कम करती है।कैसे करें बच्चों को मोबाइल की लत से दूर?
- समय तय करें: बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल के लिए समय निर्धारित करें। दिन में 1 घंटे से ज्यादा उन्हें मोबाइल का इस्तेमाल न करने दें।
- सीमित उपयोग सिखाएं: बच्चों को यह समझाएं कि मोबाइल का सही और सीमित समय में उपयोग कैसे करना है।
- परिवार के साथ समय बिताएं: माता-पिता बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताएं ताकि वे मोबाइल से दूर रहें और परिवार के साथ जुड़ाव महसूस करें।
- मनोरंजन का विकल्प दें: बच्चों को आउटडोर गेम्स, किताबें पढ़ने और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में शामिल करें।

