
जतिन नचरानी-
रायपुर। जब जुनून हो अटूट, मेहनत हो निरंतर और सेवा हो लक्ष्य, तो दुनिया खुद आपके नाम का सम्मान लिखती है। कांकेर जिले के भानुप्रतापुर के निवासी डॉ. प्रदीप साहू ने अपने समर्पण और उत्कृष्ट कार्यों से न केवल बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में इतिहास रच दिया, बल्कि अपने देश का नाम भी रोशन कर दिया। दिल्ली में आयोजित ग्लोबल समिट के दौरान, अफ्रीका की प्रतिष्ठित ‘वेबिक यूनिवर्सिटी’ ने उन्हें मानद डॉक्टरेट उपाधि से सम्मानित किया।
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यह सम्मान सिर्फ एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उनके अथक प्रयासों और अटूट समर्पण का प्रमाण है। उन्होंने विदेशों में आकर्षक नौकरियों के प्रस्तावों को ठुकराया और अपने देश की सेवा करने का संकल्प लिया। बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपने ज्ञान और अनुभव का उपयोग करते हुए, उन्होंने भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
डॉ. साहू ने अत्याधुनिक तकनीकों और नवाचारों को अपनाकर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के नए द्वार खोले हैं। उनका उद्देश्य भारतीय अस्पतालों और चिकित्सा प्रणालियों को विश्वस्तरीय तकनीकों से सशक्त बनाना है। उनकी यह उपलब्धि सिर्फ छत्तीसगढ़ या बस्तर के लिए नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए गौरव का प्रतीक बन गई है।
डॉ. प्रदीप साहू की यह उपलब्धि हर उस युवा के लिए प्रेरणा है, जो बड़े सपने देखने की हिम्मत रखता है और अपनी मेहनत से उन्हें साकार करना चाहता है। यह साबित करता है कि अगर इरादे बुलंद हों, तो कोई भी मुश्किल राह रोक नहीं सकती।
सपनों को ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए हौसला चाहिए, और डॉ. साहू ने दिखा दिया कि जब इरादा मजबूत हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं!

