
भारत ने बांग्लादेश से आने वाले सामानों पर लगाई सख्ती: अब सिर्फ दो बंदरगाहों से मिलेगी एंट्री, नॉर्थईस्ट को मिलेगा बड़ा फायदा
भारत-बांग्लादेश व्यापार: नए नियमों से उठ रहे सवाल
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बांग्लादेशी कपड़ों पर आया नया नियम
सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है – अब बांग्लादेश से आने वाले रेडीमेड कपड़े सिर्फ कोलकाता और न्हावा शेवा बंदरगाहों से ही आएंगे! इससे पहले, ज़्यादातर कपड़े ज़मीनी रास्ते से आते थे, लेकिन अब ये रास्ता बंद हो गया है। इससे ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ेगा और व्यापार का तरीका भी बदल जाएगा। ये फैसला दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को दिखाता है।
कौन से सामान अब नहीं आएंगे ज़मीनी रास्ते से?- कपड़ों के अलावा, प्लास्टिक के सामान, लकड़ी के फर्नीचर, शीतल पेय, पैक्ड खाना, फलों के जूस, कपास, और कपास के कचरे का आयात भी ज़मीनी रास्ते से बंद हो गया है। पूर्वोत्तर राज्यों के चेकपोस्ट और पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में भी ये नियम लागू होंगे। इससे छोटे व्यापारियों को सबसे ज़्यादा नुकसान होगा।
भारत का कड़ा रुख क्यों?- भारत ने ये कदम इसलिए उठाया क्योंकि बांग्लादेश भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से आने वाले कुछ सामानों को अपनी सीमा में नहीं आने दे रहा था। बार-बार बात करने के बाद भी कोई हल नहीं निकला, इसलिए भारत को ये एकतरफा फैसला लेना पड़ा। इससे दोनों देशों के रिश्ते और बिगड़ सकते हैं।
ट्रांस-शिपमेंट की सुविधा भी खत्म- पहले बांग्लादेश को भारत के बंदरगाहों और एयरपोर्ट से अपने सामान तीसरे देश भेजने की सुविधा मिलती थी, लेकिन अब वो भी खत्म हो गई है। इसका कारण भी बांग्लादेश द्वारा व्यापारिक संतुलन न बना पाना माना जा रहा है।
राजनीतिक तनाव और अस्थिरता- हाल के महीनों में भारत-बांग्लादेश के रिश्ते खराब हुए हैं। बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता और अल्पसंख्यकों पर हमले भारत की चिंता बढ़ा रहे हैं।
पूर्वोत्तर राज्यों को नुकसान- बांग्लादेश के प्रतिबंधों से पूर्वोत्तर राज्यों के उद्योगों को नुकसान हुआ है। बांग्लादेश ने भारतीय धागे और चावल के आयात पर रोक लगा दी है, जिससे किसान और व्यापारी परेशान हैं।
आत्मनिर्भर भारत’ की ओर कदम- भारत सरकार अब ‘आत्मनिर्भर भारत’ और पूर्वोत्तर राज्यों के विकास पर ध्यान दे रही है। इससे स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

