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भारत में नंबर 2 बनने की तैयारी में Escorts Kubota, जापानी तकनीक और भारतीय कीमत का मिलेगा कॉम्बो

 खेती में क्रांति: Escorts Kubota की नई रणनीति से किसानों को मिलेगा फायदा!-2021 में, जापान की कुबोटा और भारत की एस्कार्ट्स कंपनी की साझेदारी से बनी एस्कार्ट्स कुबोटा लिमिटेड (EKL) अब भारतीय कृषि क्षेत्र में तहलका मचाने को तैयार है। कंपनी का लक्ष्य अगले कुछ सालों में देश की दूसरी सबसे बड़ी ट्रैक्टर निर्माता बनना है, और इसके लिए एक शानदार योजना बनाई गई है।

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नए ट्रैक्टर और मशीनें – एक नई शुरुआत:EKL के चेयरमैन, निखिल नंदा, का कहना है कि अगले चार-पांच साल कंपनी के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। Farmtrac, Powertrac, और Kubota ब्रांड्स के तहत कई नए ट्रैक्टर और कृषि मशीनें बाजार में उतरने वाली हैं। ये न केवल भारत में, बल्कि दुनिया के दूसरे देशों में भी उपलब्ध होंगी और कंपनी के विकास में अहम भूमिका निभाएंगी।

कम दाम, ज़्यादा गुणवत्ता – एक बेहतरीन सौदा:EKL की योजना है कि कुबोटा की अच्छी तकनीक और एस्कार्ट्स की किफायती लागत को मिलाकर ऐसे ट्रैक्टर बनाए जाएँ जो कम कीमत में बेहतरीन गुणवत्ता वाले हों। कंपनी को लगता है कि अगर उत्पाद बहुत महंगा होगा, तो उसकी डिमांड कम हो जाएगी। इसलिए, ध्यान इस बात पर है कि बिना लागत बढ़ाए, गुणवत्ता में सुधार किया जाए।

देशव्यापी नेटवर्क – हर किसान तक पहुँच:EKL ने उत्तर और पश्चिम भारत में एस्कार्ट्स और दक्षिण व पूर्व भारत में कुबोटा के मज़बूत नेटवर्क को मिलाकर देशभर में अपनी पहुँच बढ़ाई है। कंपनी के पास 1500 से ज़्यादा डीलरशिप हैं, लेकिन और भी कई क्षेत्रों में नए डीलर नियुक्त किए जाएँगे ताकि हर किसान तक आसानी से पहुँचा जा सके।

विदेशी अनुभव – सीखने का अवसर:कुबोटा की अमेरिकी टीम ने हाल ही में भारत आकर डीलरों को प्रशिक्षण दिया और अपनी बिक्री बढ़ाने के तरीके बताए। यूरोप में EKL के ट्रैक्टरों की सफलता से कुबोटा ने कॉम्पैक्ट ट्रैक्टर सेगमेंट में अपनी खोई हुई हिस्सेदारी वापस पाई है।

विश्व बाजार में भारतीय निर्माण – गर्व का क्षण:EKL भारत में ट्रैक्टरों का डिज़ाइन, निर्माण और उत्पादन करके कुबोटा के वैश्विक नेटवर्क के माध्यम से उन्हें दुनिया भर में बेचने की योजना बना रही है। इससे न केवल EKL का विकास होगा बल्कि कुबोटा की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति भी मज़बूत होगी।

निर्यात में बढ़ोतरी – आगे की राह:वर्तमान में EKL की कुल बिक्री में निर्यात का हिस्सा 5% है, लेकिन कंपनी का लक्ष्य इसे 10 से 15% तक बढ़ाना है। इसके लिए भारतीय संयंत्रों में उत्पादन और गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाया जा रहा है।

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