
भगवान शिव के प्रिय मास सावन का पहला सोमवार आज है। मान्यता है कि इस दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने से इंसान की हर मनोकामना पूरी होती है और उसके सारे कष्टों का अंत होता है। भक्तगण इस दिन उपवास रखते हैं। कुंवारी कन्याएं ये व्रत अच्छे पति की कामना के लिए करती हैं। इस बार सावन माह में चार सोमवार आए हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बता दें कि 11 जुलाई से शुरू हुआ सावन माह 9 अगस्त को खत्म होगा और इसी दिन ‘रक्षा बंधन’ का त्योहार मनाया जाएगा। यह महीना श्रद्धा, तपस्या और शिव आराधना का श्रेष्ठ समय होता है।
सावन के सोमवार की पूजा सामग्री
जल (गंगाजल हो तो श्रेष्ठ)
बेलपत्र
दूध, दही, शहद, घी और शक्कर (पंचामृत बनाने के लिए)
सफेद फूल , धतूरा, कनेर)
चंदन
भस्म या विभूति
धूप, दीप, कपूर
अक्षत (चावल)
जल से भरा लोटा (अभिषेक हेतु)
पूजा विधि
सबसे पहले शिवलिंग को गंगाजल से स्नान कराएं।
फिर पंचामृत से अभिषेक करें और अंत में साफ जल से धो लें।
बेलपत्र अर्पित करें (बेलपत्र पर चंदन से ‘ॐ’ लिखकर अर्पण करें)।
सफेद फूल, धतूरा, भस्म, फल अर्पित करें।
शिव मंत्रों का जाप करते हुए शिवलिंग का अभिषेक करें।
सावन के सोमवार व्रत का महत्व
मनोकामना पूर्ण होती है।
विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
स्वास्थ्य में सुधार और मानसिक शांति मिलती है।
शिव कृपा से पितृ दोष और ग्रह दोष भी शांत होते हैं।
व्रत में आहार संबंधी नियम
व्रती को दिनभर फलाहार करना चाहिए जैसे फल, दूध, साबूदाना, मूँगफली, या सिंघाड़े का आटा।
अनाज, नमक, और तामसिक भोजन से दूर रहें।
अगर निर्जल व्रत कठिन हो तो नारियल पानी या सामान्य जल का सेवन किया जा सकता है।
दिनभर मन, वाणी और कर्म की पवित्रता बनाए रखें, किसी से कटुता, झूठ या क्रोध न करें।
अधिक से अधिक समय शिव मंत्रों के जाप, ध्यान और भजन में लगाएं।

