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क्या अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया अब मजबूत होगा या फिर गिरेगा? जानें ताज़ा हालात और एक्सपर्ट की राय

 रुपया हल्का मजबूत: क्या है वजह?-सोमवार को रुपया 9 पैसे चढ़कर 86.43 पर पहुंच गया। लेकिन क्या ये बढ़त कायम रहेगी? आइये जानते हैं।

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डॉलर की कमजोरी और भारत-अमेरिका ट्रेड वार्ता-अमेरिकी डॉलर के थोड़े कमजोर होने से रुपये को सहारा मिला है। लेकिन भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ वार्ता अभी भी अनिश्चित है, जिससे रुपये की बढ़त सीमित रही। आयातकों की डॉलर की लगातार मांग भी रुपये के लिए एक चुनौती है। हालांकि, कुछ नए व्यापारिक समझौतों से रुपये को थोड़ा समर्थन मिला है, लेकिन विदेशी निवेशकों के लगातार निवेश निकालने से ये असर कम हो गया है। कुल मिलाकर, रुपये में अभी कोई बहुत बड़ा बदलाव नहीं आया है। शुक्रवार को रुपये का बंद 86.52 पर हुआ था, यानी मामूली ही बढ़त हुई है।

 व्यापार समझौते और विदेशी निवेश का असर-यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच नए व्यापार समझौते से कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, जिससे भविष्य में ऊर्जा की मांग बढ़ने की उम्मीद है। लेकिन, विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। शुक्रवार को ही विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 1,979 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इससे रुपये पर दबाव बना हुआ है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी लगातार दूसरे हफ्ते कम हुआ है, जो अब 695.489 बिलियन डॉलर पर आ गया है। पिछले साल सितंबर में यह 704.885 बिलियन डॉलर के उच्चतम स्तर पर था।

 फेड की नीतिगत बैठक: क्या होगा आगे?-अब सबकी नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक पर है, जो मंगलवार से शुरू होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक के फैसले रुपये की दिशा तय करेंगे। अगर फेड ब्याज दरों में कमी करता है, तो डॉलर कमजोर हो सकता है और रुपये को सहारा मिल सकता है। लेकिन अगर फेड सख्त रुख अपनाता है, तो डॉलर मजबूत हो सकता है और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल, विशेषज्ञों का अनुमान है कि रुपया 86.47 के आसपास स्थिर रह सकता है। महीने के अंत में डॉलर की मांग बढ़ सकती है, जिससे कुछ उतार-चढ़ाव हो सकता है। इसलिए, आयातकों और निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

 शेयर बाजार में गिरावट का असर-सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भी गिरावट देखी गई। सेंसेक्स 67 अंक गिरकर 81,395 पर और निफ्टी 14 अंक गिरकर 24,851 पर बंद हुआ। इससे रुपये की भावना पर भी असर पड़ा। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक बाजार में अनिश्चितता के कारण घरेलू शेयर बाजार कमजोर दिख रहा है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार समझौतों और तेल की कीमतों में स्थिरता आती है, तो शेयर बाजार में सुधार हो सकता है।

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