
निर्यात को मिलेगी नई उड़ान: भारत की नई रणनीति!
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!नए बाज़ार की तलाश और अमेरिकी टैरिफ का सामना!-भारत का वाणिज्य मंत्रालय इस हफ्ते निर्यातकों के साथ खास मीटिंग्स की एक सीरीज शुरू कर रहा है। इसमें केमिकल और जेम्स-एंड-ज्वैलरी जैसे बड़े उद्योग शामिल होंगे। इन चर्चाओं का मुख्य एजेंडा नए ग्लोबल बाज़ारों की पहचान करना और अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ से बचने के रास्ते खोजना है। मंत्रालय का मानना है कि अगर हम जल्दी से दूसरे देशों में अपने उत्पादों के लिए नए बाज़ार बना लेते हैं, तो भारतीय उद्योगों पर पड़ने वाला आर्थिक दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा। यह एक proactive कदम है ताकि हमारे एक्सपोर्टर्स को किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार किया जा सके।
बजट का वादा, निर्यात प्रमोशन मिशन पर तेज़ काम!-सरकार ने 2025-26 के बजट में एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन का ऐलान किया था, और अब इस पर तेज़ी से काम हो रहा है। मंत्रालय के अधिकारी इस मिशन को जल्द से जल्द लागू करने के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं। इसका मकसद सिर्फ निर्यात बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसी नई नीतियां बनाना भी है जो हमारे उद्योगों को मज़बूती दें, खासकर उन सेक्टर्स को जो अमेरिकी टैरिफ से सबसे ज़्यादा प्रभावित हो सकते हैं। यह मिशन भारतीय निर्यात को एक नई दिशा देने और वैश्विक स्तर पर हमारी स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
50% अमेरिकी टैरिफ का बड़ा झटका: 48 अरब डॉलर का निर्यात खतरे में!-27 अगस्त से अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 50% तक का भारी टैक्स लगाना शुरू कर दिया है, जिसका सीधा असर करीब 48 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात पर पड़ेगा। यह भारतीय उद्योगों के लिए एक बहुत बड़ा झटका है, क्योंकि इतने ऊंचे शुल्क से न केवल उनके मुनाफे पर असर पड़ेगा, बल्कि ग्लोबल मार्केट में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता भी कम हो जाएगी। यह स्थिति भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करती है, और इससे निपटने के लिए नई रणनीतियों की तुरंत आवश्यकता है।
कौन से सेक्टर सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे?-इस नए अमेरिकी टैरिफ से सबसे ज़्यादा मार टेक्सटाइल, जेम्स-एंड-ज्वैलरी, श्रिम्प, लेदर-फुटवियर, एनिमल प्रोडक्ट्स, केमिकल्स और मशीनरी जैसे सेक्टरों पर पड़ने की आशंका है। इन उद्योगों में काम करने वाले लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी पर भी खतरा मंडराने लगा है। हालांकि, राहत की बात यह है कि दवाइयाँ, ऊर्जा उत्पाद और इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे महत्वपूर्ण सेक्टरों को इन टैरिफ से बाहर रखा गया है, जिससे कुछ हद तक राहत मिली है।
अमेरिका: भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साथी!-भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक संबंध हमेशा से बहुत मजबूत रहे हैं। 2024-25 में, भारत का अमेरिका को निर्यात 86.5 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 45.3 अरब डॉलर का था। कुल मिलाकर, दोनों देशों के बीच व्यापार 131.8 अरब डॉलर का रहा। अमेरिका भारत के लिए सबसे बड़ा निर्यात बाज़ार है, जो हमारे कुल निर्यात का लगभग 20% हिस्सा रखता है। इस मजबूत रिश्ते को बनाए रखना और किसी भी बाधा को दूर करना भारत के आर्थिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

