
दिल्ली-पंजाब में हाहाकार: यमुना का रौद्र रूप और पंजाब के डूबे गांव!
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!यमुना का तांडव: दिल्ली की सड़कें बनीं झीलें, जनजीवन अस्त-व्यस्त!-इस समय दिल्ली की हालत बहुत खराब है। यमुना नदी अपने खतरे के निशान से करीब 2 मीटर ऊपर बह रही है, और इसका पानी उन इलाकों में भी घुस गया है जहाँ कभी पानी की सोच भी नहीं सकते थे। मयूर विहार और अक्षरधाम जैसे जाने-माने इलाके पानी में पूरी तरह डूब चुके हैं। यमुना के किनारे बसे निचले इलाकों का तो पूछिए ही मत, वहां तो हालात बहुत ही गंभीर हैं। लोग फंसे हुए हैं और उन्हें निकालने के लिए प्रशासन को नावों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। ड्रोन से ली गई तस्वीरें तो और भी डरावनी हैं, सिग्नेचर ब्रिज के ऊपर से देखने पर ऐसा लगता है जैसे पूरी दिल्ली एक बड़ी झील बन गई हो। निगमबोध घाट, जहाँ लोगों का अंतिम संस्कार होता है, वो भी पानी में समा गया है, जिससे बहुत ज़रूरी काम भी रुक गए हैं। यहाँ तक कि दिल्ली सचिवालय में भी पानी पहुँच गया है, जिससे सरकारी कामकाज पर भी असर पड़ रहा है। इसके अलावा, सीवर का पानी ओवरफ्लो होकर सड़कों पर आ गया है, जिससे बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। सरकार ने यमुना के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर, यानी राहत कैंपों में पहुँचाया था, लेकिन अब तो उन कैंपों में भी पानी घुस गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि सरकार ने पहले से तैयारी क्यों नहीं की। अब कई परिवार मंदिरों और स्कूलों में शरण लेने को मजबूर हैं। सीवर का गंदा पानी और बाढ़ का पानी मिलकर लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद बाढ़ वाले इलाकों का दौरा कर रहे हैं और राहत के काम तेज़ करने की बात कह रहे हैं। लेकिन विपक्ष का कहना है कि सरकार की तरफ से जो इंतज़ाम किए गए हैं, वो काफी नहीं हैं और हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।
पंजाब में बाढ़ का कहर: 1900 से ज़्यादा गांव डूबे, किसानों की कमर टूटी!-पंजाब में तो हालात दिल्ली से भी ज़्यादा चिंताजनक हैं। राज्य के 23 जिलों में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। ताज़ा रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक 1900 से भी ज़्यादा गांव पानी में डूब चुके हैं और करीब 3.84 लाख लोग इस बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इस बाढ़ का सबसे बुरा असर किसानों पर पड़ा है। उनकी लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है, जिससे उनकी साल भर की मेहनत पर पानी फिर गया है। सेना और एनडीआरएफ की टीमें लगातार लोगों को बचाने और राहत पहुँचाने के काम में लगी हुई हैं। अब तक 20 हजार से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुँचाया जा चुका है। लेकिन, जिन गांवों का सड़क से संपर्क पूरी तरह टूट गया है, वहाँ तक राहत सामग्री पहुँचाना एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया है। पीने के पानी और खाने-पीने की चीज़ों की भी भारी कमी हो गई है, जिससे लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। इस भारी बारिश और नदियों के उफान ने न सिर्फ लोगों के घरों को तबाह किया है, बल्कि उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को भी पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। बूढ़े और बीमार लोगों को नावों के ज़रिए अस्पतालों तक पहुँचाया जा रहा है। बाढ़ का असर इतना भयानक है कि इसका असर पाकिस्तान के पंजाब तक भी पहुँच गया है। वहाँ भी कई इलाके पानी में डूब गए हैं और हालात नियंत्रण से बाहर होते जा रहे हैं। यहाँ तक कि भारत-पाकिस्तान सीमा पर लगी बाड़ (फेंसिंग) और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की कई चौकियां भी पानी में डूब गई हैं, जो अपने आप में एक गंभीर स्थिति का संकेत है।

