
Asia Cup 2025: संजू सैमसन और रिंकू सिंह के लिए मुश्किल, क्या जितेश शर्मा को मिलेगा मौका?
एशिया कप में टीम इंडिया का ‘सीक्रेट प्लान’: सैमसन और रिंकू का पत्ता कट सकता है?-10 सितंबर को भारत और यूएई के बीच होने वाले एशिया कप के मुकाबले से पहले टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन को लेकर ज़ोर-शोर से चर्चाएं शुरू हो गई हैं। खास तौर पर, विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन की जगह को लेकर सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। अभ्यास सत्र में जो कुछ देखने को मिला, उससे तो यही लग रहा है कि इस बार संजू सैमसन की जगह जितेश शर्मा को मौका मिल सकता है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!अभ्यास सत्र से मिले चौंकाने वाले संकेत-टीम इंडिया के सभी खिलाड़ियों ने अभ्यास सत्र में जमकर पसीना बहाया। संजू सैमसन भी बैटिंग किट पहनकर आए थे, लेकिन उन्हें बैटिंग का ज़्यादा मौका नहीं मिला। वहीं, शुभमन गिल, सूर्यकुमार यादव और अभिषेक शर्मा जैसे खिलाड़ियों को लंबे समय तक नेट पर अभ्यास कराया गया, जबकि सैमसन को किनारे ही रहना पड़ा। इस दौरान, गौतम गंभीर को सैमसन से करीब तीन मिनट तक बातचीत करते हुए देखा गया। माना जा रहा है कि यह बातचीत उनके बल्लेबाजी क्रम या भूमिका को लेकर थी। लेकिन जब बैटिंग की बारी आई, तो उन्हें काफी देर से बुलाया गया, जो इस बात का साफ संकेत था कि फिलहाल टीम मैनेजमेंट का भरोसा गिल और अभिषेक पर है, जो ओपनिंग की जिम्मेदारी संभालेंगे। यह दिखाता है कि टीम मैनेजमेंट किस तरह से खिलाड़ियों के फॉर्म और टीम की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर फैसले ले रहा है।
जितेश शर्मा पर दांव लगा सकती है टीम इंडिया-टीम इंडिया के पास इस समय दो बेहतरीन विकेटकीपर बल्लेबाज हैं – संजू सैमसन और जितेश शर्मा। दोनों की अपनी-अपनी खूबियां हैं, लेकिन सबसे बड़ा अंतर यह है कि सैमसन ज़्यादातर टॉप ऑर्डर में खेलते हैं, जबकि जितेश मिडिल ऑर्डर में टिककर खेलने की काबिलियत रखते हैं। यही कारण है कि अभ्यास सत्र में जितेश का आत्मविश्वास भी देखने लायक था। उन्हें लगातार बैटिंग का मौका मिला और उन्होंने इसका भरपूर फायदा उठाया। ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि यूएई के खिलाफ होने वाले पहले मैच में विकेटकीपर बल्लेबाज के तौर पर जितेश शर्मा को ही मौका दिया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो संजू सैमसन को एक बार फिर प्लेइंग इलेवन से बाहर बैठना पड़ सकता है, जो उनके लिए निराशाजनक होगा।
रिंकू सिंह का भी टीम में आना मुश्किल?-सिर्फ संजू सैमसन ही नहीं, बल्कि युवा बल्लेबाज रिंकू सिंह की जगह भी टीम में मुश्किल नज़र आ रही है। हार्दिक पांड्या और अक्षर पटेल जैसे ऑलराउंडर पहले से ही टीम में अपनी जगह पक्की कर चुके हैं। ऐसे में, रिंकू सिंह के लिए प्लेइंग इलेवन में जगह बनाना आसान नहीं होगा। अभ्यास सत्र के दौरान रिंकू को भी काफी देर से बैटिंग के लिए बुलाया गया, जो इस बात का संकेत दे रहा है कि शायद उन्हें भी शुरुआती मैच में मौका न मिले। टीम मैनेजमेंट फिलहाल टीम के संतुलन को सबसे ज़्यादा महत्व दे रहा है, और इस रणनीति के तहत रिंकू और सैमसन दोनों को फिलहाल फिट नहीं माना जा रहा है। यह दिखाता है कि टीम मैनेजमेंट किस तरह से हर पहलू पर विचार कर रहा है।
पहला मैच तय करेगा टीम की दिशा-एशिया कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में पहला मैच हमेशा टीम की आगे की राह तय करता है। भारत इस बार एक मज़बूत और संतुलित टीम के साथ उतरना चाहता है, ताकि टूर्नामेंट की शुरुआत जीत के साथ हो। यही वजह है कि कोच और मैनेजमेंट फिलहाल ज़्यादा प्रयोग करने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। गिल और अभिषेक की ओपनिंग जोड़ी, मिडिल ऑर्डर में सूर्यकुमार यादव का अनुभव, और फिनिशिंग के लिए जितेश शर्मा पर भरोसा जताया जा रहा है। वहीं, गेंदबाजी में हार्दिक पांड्या और अक्षर पटेल का अनुभव टीम को और मज़बूती देगा। यह एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है ताकि टीम शुरुआती झटके से बच सके।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?-विशेषज्ञों का मानना है कि टीम मैनेजमेंट का यह फैसला खिलाड़ियों के वर्तमान फॉर्म और टीम की ज़रूरतों पर आधारित है। संजू सैमसन एक बेहतरीन खिलाड़ी हैं, लेकिन अगर टीम को मिडिल ऑर्डर में एक मज़बूत फिनिशर की ज़रूरत है, तो जितेश शर्मा एक बेहतर विकल्प हो सकते हैं। रिंकू सिंह भी भविष्य के सितारे हैं, लेकिन फिलहाल टीम के संतुलन को देखते हुए उन्हें इंतज़ार करना पड़ सकता है। यह दिखाता है कि किस तरह से हर खिलाड़ी का टीम में योगदान महत्वपूर्ण होता है, भले ही वह सीधे तौर पर मैदान पर न दिखे।
सैमसन और रिंकू के लिए मुश्किल शुरुआत-कुल मिलाकर, संजू सैमसन और रिंकू सिंह के लिए एशिया कप की शुरुआत थोड़ी मुश्किल भरी हो सकती है। जितेश शर्मा की जगह लगभग तय मानी जा रही है, जबकि बाकी बल्लेबाज भी अपनी स्थिति मज़बूत कर चुके हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि टीम इंडिया का यह चुना हुआ कॉम्बिनेशन मैदान पर कितना असरदार साबित होता है और क्या यह रणनीति टीम को जीत दिला पाती है। यह टीम का एक ऐसा कदम है जो भविष्य में भी अन्य मैचों के लिए एक मिसाल बन सकता है।

