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केरल में ब्रेन-ईटिंग अमीबा का खतरा: क्या है यह जानलेवा संक्रमण और कैसे बचें?

 दिमाग को खाने वाला अमीबा: केरल में दहशत का सबब!-केरल इन दिनों एक ऐसी बीमारी की चपेट में है जिसने सबको चिंता में डाल दिया है। ये कोई आम बीमारी नहीं, बल्कि एक बेहद खतरनाक अमीबा है जो सीधे हमारे दिमाग पर हमला करता है। इसे ‘ब्रेन-ईटिंग अमीबा’ के नाम से जाना जाता है, और मेडिकल की दुनिया में इसे प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (PAM) कहते हैं। साल 2025 में अब तक 69 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं, जिनमें से 19 की दुखद मौत हो चुकी है। ये आंकड़े बताते हैं कि यह संक्रमण कितना जानलेवा है। सबसे डरावनी बात यह है कि यह बीमारी बहुत तेज़ी से फैलती है और सीधा दिमाग पर वार करती है, जिससे मरीज़ को बचाना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

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 ये ‘दिमाग खाने वाला’ अमीबा आखिर है क्या और कैसे फैलता है?-स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, यह ख़तरनाक संक्रमण ‘Naegleria fowleri’ नाम के एक छोटे से अमीबा की वजह से होता है। इसे ‘ब्रेन-ईटिंग अमीबा’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह हमारे दिमाग की कोशिकाओं को खा जाता है, उन्हें नष्ट कर देता है। यह अमीबा अक्सर पानी में पाया जाता है, खासकर गर्म पानी में। जब लोग किसी तालाब, झील या नदी में नहाने जाते हैं, तो यह पानी हमारी नाक के ज़रिए शरीर में घुस जाता है। एक बार अंदर जाने के बाद, यह सीधा दिमाग तक पहुँच जाता है और वहाँ भयंकर सूजन पैदा कर देता है।इस बीमारी से लड़ने की सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि इसके शुरुआती लक्षण बिल्कुल आम बुखार या सिरदर्द जैसे लगते हैं। लोग इसे मामूली समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। लेकिन जब यह अमीबा दिमाग पर असर करना शुरू करता है, तो हालत इतनी तेज़ी से बिगड़ती है कि डॉक्टरों के पास भी इलाज का ज़्यादा समय नहीं बचता। यही कारण है कि इसे दुनिया के सबसे घातक संक्रमणों में गिना जाता है।

 बीमारी के लक्षण कैसे पहचानें? कहीं देर न हो जाए!-डॉक्टरों का कहना है कि ब्रेन-ईटिंग अमीबा के शुरुआती लक्षण काफी हद तक दिमागी बुखार (मेनिनजाइटिस) जैसे होते हैं। शुरुआत में आपको तेज़ सिरदर्द, बुखार, जी मिचलाना और उल्टी जैसा महसूस हो सकता है। कुछ लोगों को तो गंध या स्वाद का पता लगाने में भी दिक्कत होने लगती है। जैसे-जैसे यह संक्रमण बढ़ता है, दिमाग में सूजन आ जाती है (जिसे सेरेब्रल एडिमा कहते हैं) और मरीज़ बेहोशी की हालत में पहुँच सकता है।सबसे चिंता की बात यह है कि लक्षण दिखने के महज़ 1 से 2 दिन के अंदर ही बीमारी बहुत गंभीर हो जाती है। इसलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि अगर किसी को पानी में नहाने के बाद अचानक तेज़ बुखार, सिरदर्द और उल्टी जैसी समस्याएं हों, तो फौरन डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए। अक्सर लोग इसे कोई आम वायरल समझकर छोड़ देते हैं, लेकिन यही लापरवाही जान पर भारी पड़ सकती है।

 कौन लोग सबसे ज़्यादा खतरे में हैं? जानिए और सावधान हो जाइए!-केरल के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस PAM बीमारी का खतरा ज़्यादातर बच्चों, किशोरों और युवा लोगों को होता है। इसकी वजह यह है कि ये लोग अक्सर तालाबों, झीलों या नदियों में नहाने और खेलने के लिए जाते हैं। गर्मियों के मौसम में यह संक्रमण ज़्यादा फैलता है क्योंकि इस दौरान पानी का तापमान अमीबा के पनपने के लिए सबसे अच्छा होता है।विशेषज्ञ बताते हैं कि यह अमीबा नाक के ज़रिए बहुत तेज़ी से दिमाग तक पहुँच जाता है और हमारे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को कमज़ोर कर देता है। इसी वजह से ज़्यादातर मामलों में मरीज़ को बचाना बहुत मुश्किल हो जाता है। दुनिया भर में इस संक्रमण से मरने वालों की दर 95% से भी ज़्यादा है। इसका मतलब है कि एक बार अगर किसी को यह संक्रमण हो जाए, तो उसके ठीक होने की उम्मीद बहुत कम रह जाती है।

सरकार और स्वास्थ्य विभाग क्या कर रहे हैं? क्या हैं बचाव के उपाय?-केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने बताया है कि इस साल जो भी मामले सामने आए हैं, वे अलग-अलग लोगों में हुए हैं। यानी किसी एक ही जगह से यह संक्रमण फैलने की पुष्टि नहीं हुई है। पिछले साल 2024 में ऐसी स्थिति बनी थी जब एक ही तालाब से कई लोग संक्रमित हो गए थे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है।सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे नदियों, तालाबों और गर्म पानी के झरनों में नहाने से पहले बहुत सावधानी बरतें। खासकर बच्चों को बिना किसी सुरक्षा के इन जगहों पर तैरने से रोका जाना चाहिए। लोगों को यह भी सलाह दी गई है कि वे कोशिश करें कि पानी उनकी नाक के अंदर न जाए और जहाँ तक हो सके, साफ पानी का ही इस्तेमाल करें।

 इस जानलेवा अमीबा से कैसे बचें? अपनाएं ये ज़रूरी सावधानियां!-विशेषज्ञों का कहना है कि PAM से बचने का सबसे असरदार तरीका है सावधानी बरतना। अगर आप किसी तालाब, झील या नदी में जाते हैं, तो अपनी नाक पर क्लिप लगा सकते हैं ताकि पानी आपकी नाक में न जाए। गर्म पानी में ज़्यादा देर तक न नहाएं और हमेशा साफ पानी को ही प्राथमिकता दें।इसके अलावा, अगर आपको कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। बीमारी का जल्दी पता लगाना ही इससे बचने का सबसे बड़ा हथियार है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को जागरूक करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सबसे ज़रूरी है कि हम खुद भी सतर्क रहें। आपकी अपनी सावधानी ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है।

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