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सितंबर में लोन की औसत ब्याज दर 0.24 फीसदी घटी

नई दिल्ली। इस साल रेपो दर में एक फीसदी की कटौती से सितंबर में लोन की औसत ब्याज दर 0.24 फीसदी घट गई। हालांकि, लगातार पांच महीनों तक जमा पर ब्याज में कटौती के बाद बैंकों ने सितंबर में मामूली बढ़ोतरी कर दी। फरवरी से सितंबर के दौरान कर्ज की ब्याज दरों में 0.83 फीसदी और जमा ब्याज में 1.02 फीसदी की कटौती की गई।
सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) के आंकड़ों के मुताबिक, भविष्य में ऋण दरों में सीमित कटौती की उम्मीद है। दिसंबर तिमाही में ये बढ़ भी सकती हैं। यह संभावना ऋण मांग में मौसमी वृद्धि और जमा राशि जुटाने में सुस्ती की उम्मीदों से बनी है। सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) के नए ऋणों की औसत ब्याज दर सितंबर में तेजी से गिरकर 8.5 प्रतिशत हो गई। यह अगस्त की तुलना में 0.24 फीसदी कम है। उम्मीद से ज्यादा बड़ा यह सुधार ग्राहकों के लिए त्योहारी सीजन का तोहफा प्रतीत होता है।
उदाहरण के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा ने 28 अगस्त से खुदरा ऋण दरों में 0.25 से 0.70 फीसदी की कटौती की थी। आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक और एसबीआई जैसे प्रमुख ऋणदाताओं ने सितंबर में कई ऑफर पेश किए। विभिन्न बैंकों ने कुछ निश्चित अवधियों पर सीमांत निधि आधारित उधार दर (एमसीएलआर) में 0.05 से 0.15 फीसदी तक कटौती की। इस कारण सितंबर में उधार दरों में भारी कमी आई।
0.25% सस्ते सरकारी बैंकों के कर्ज
सितंबर में सरकारी बैंकों के कर्ज औसतन 0.25 फीसदी सस्ते हुए। निजी क्षेत्र के बैंक स्थिर गति से आगे बढ़ रहे हैं। जून में उदार कटौती के बाद जुलाई में दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की। उसके बाद से उन्होंने लगातार दरें कम की हैं। सितंबर में निजी बैंकों के कर्ज की औसत ब्याज दरें 0.10 फीसदी कम हो गई। कुल मिलाकर, सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के नए कर्जों में मौजूदा ढील चक्र के दौरान 0.83 फीसदी की गिरावट आई है। यह जनवरी के 9.3 प्रतिशत से घटकर 8.5 प्रतिशत हो गया है।

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फरवरी में लंबे समय बाद घटी थी रेपो दर
फरवरी, 2025 में आरबीआई ने लंबे समय बाद पहली बार रेपो दर में कटौती की। बैंकों ने हर महीने कर्ज पर औसत ब्याज दर को 9 फीसदी तक घटाया। जून में यह कमी बढ़कर 0.58 फीसदी तक पहुंच गई। ऐसा इसलिए, क्योंकि आरबीआई ने रेपो दर में फिर से 0.50 फीसदी की कमी की। हालांकि, जुलाई में सरकारी बैंकों ने इसके उलट कर्ज की औसत ब्याज दरें 0.19 फीसदी तक बढ़ा दी। निजी क्षेत्र के बैंकों ने दर कटौती का चक्र जारी रखा। अगस्त में ढील फिर से शुरू हुई। त्योहारी मौसम शुरू होते ही सितंबर में फिर सरकारी बैंकों ने बड़े पैमाने पर लोन सस्ते कर दिए।

5.6% पर पहुंची जमा पर ब्याज दरें
रिपोर्ट के अनुसार, जमा पर औसत ब्याज दरें अगस्त में कई वर्षों के निचले स्तर 5.56 फीसदी पर आ गई थी। हालांकि सितंबर में यह मामूली बढकर 5.6 फीसदी पर पहुंच गई। लेकिन फरवरी से लेकर सितंबर तक के दौरान इसमें 1.02 फीसदी की भारी गिरावट आई है। यह इसलिए हुआ क्योंकि उधारी पर भी ब्याज दरें इस दौरान तेजी से घटती रहीं और इससे बैंकों की लागत की दरें कम हो गईं।

कर्ज की मांग बढ़ी तो घट गई नकदी
कर्ज की मांग में तेजी से बैंकिंग सिस्टम की नकदी में गिरावट आ गई है। अगस्त में रोजाना की औसत नकदी 2.9 लाख करोड़ रुपये थी, जो सितंबर में कम होकर 1.6 लाख करोड़ रुपये रह गई। अक्तूबर में यह और घटकर एक लाख करोड़ रुपये हो गई। यह तब हुआ, जब आरबीआई ने नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में दो बार कटौती की थी। सीआरआर वह अनुपात है, जिस अनुपात में बैंकों को एक तय नकदी आरबीआई के पास रखनी होती है।

तो पड़ सकता है ब्याज दरों पर दबाव
अक्तूबर में गिरते रुपये को सहारा देने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में सक्रिय रूप से आरबीआई हस्तक्षेप कर रहा है। अगर आरबीआई को और अधिक हस्तक्षेप करना पड़ा, तो इससे बैंकिंग प्रणाली की तरलता पर और दबाव पड़ सकता है। इससे उधारी पर कम हो रही ब्याज दरें आगे चलकर प्रभावित हो सकती है।

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