
भारत ने गैरजरूरी आयात रोकने के लिए लगाया एंटी-डंपिंग शुल्क, टाटा स्टील के सीईओ बोले- सही फैसला
नई दिल्ली। टाटा स्टील ने गुरुवार को वियतनाम से आयातित कुछ इस्पात वस्तुओं पर डंपिंग रोधी शुल्क लगाने के सरकार के फैसले को घरेलू उद्योग के लिए ‘सकारात्मक’ बताया और कहा कि इससे देश में अनुचित आयात पर अंकुश लगेगा। अक्तूबर में घरेलू इस्पात की कीमतें पांच साल के निचले स्तर पर आ गईं। इसके पीछे पीछे बढ़ते आयात सहित कई कारक जिम्मेदार थे।
टाटा स्टील के सीईओ और एमडी टीवी नरेंद्रन ने कहा कि वियतनाम और कुछ अन्य देशों का उपयोग भारतीय बाजार में सामग्री पहुंचाने के लिए के रूप में किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “जो भी चीज़ भारत में अनुचित आयात को सीमित करती है, वह भारत के इस्पात उद्योग के लिए अच्छी है। मैं ऐसी किसी भी चीज़ का समर्थन करता हूँ जो अनुचित मूल्य वाले आयात को रोकती है।”
नरेंद्रन, जो वैश्विक संस्था विश्व इस्पात संघ (वर्ल्डस्टील) के अध्यक्ष भी रह चुके हैं, ने कहा कि जब तक शिपमेंट की उचित कीमत नहीं मिलती, तब तक वह आयात के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने कहा, “मैं आयात के खिलाफ नहीं हूं, लेकिन इसकी कीमत अनुचित नहीं होनी चाहिए।”
नरेंद्रन ने कहा कि भारतीय इस्पात उद्योग ने क्षमता, दक्षता और स्थिरता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण दीर्घकालिक निवेश किया है और यह महत्वपूर्ण है कि अनुचित डंपिंग या विकृत व्यापार प्रथाओं के कारण इन प्रयासों को कमजोर न किया जाए।
एक बाजार अनुसंधान फर्म के अनुसार, अप्रैल-सितंबर वित्त वर्ष 2026 में स्टील का आयात 4.90 मिलियन टन रहा, जिसमें वियतनाम का योगदान 13 प्रतिशत था। वियतनाम से आयात 0.64 मीट्रिक टन रहा जो पिछले वर्ष की तुलना में 17 प्रतिशत अधिक है।
भारत ने वियतनाम से हॉट रोल्ड फ्लैट स्टील उत्पादों के आयात पर पांच वर्षों के लिए 121.55 अमेरिकी डॉलर प्रति टन का एंटी-डंपिंग शुल्क लगाया है। वित्त मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) ने यह शुल्क लगाने की सिफारिश की थी। इसमें कहा गया है, “इस अधिसूचना के तहत लगाया गया एंटी-डंपिंग शुल्क इस अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से पांच वर्ष की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा।

