सेहत

पेट में हो रहा है दर्द तो न करें इसे नजरअंदाज! हो सकती है बड़े खतरे की घंटी, महिलाएं अक्सर कर देती हैं इग्नोर

Stomach Cancer Symptoms : कैंसर एक ऐसी बीमारी है जो शरीर में रातों-रात नहीं पनपती बल्कि यह धीरे-धीरे अपने पैर पसारती है। इनमें से पेट का कैंसर (जिसे मेडिकल भाषा में गैस्ट्रिक कैंसर कहा जाता है) सबसे ज्यादा छलावा देने वाला माना जाता है। इसके शुरुआती लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि अक्सर महिलाएं इन्हें गैस, अपच या थकान समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। समय पर पहचान न होने पर यह कैंसर पेट की अंदरूनी परत से निकलकर लिवर, फेफड़ों और लिम्फ नोड्स तक फैल सकता है।

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इन 5 लक्षणों को कभी न करें नजरअंदाज

पेट के कैंसर के संकेत काफी हद तक साधारण पेट की खराबी जैसे लगते हैं लेकिन इनका लगातार बने रहना खतरे की घंटी है। अगर आपको बार-बार डकारें आती हैं, पेट में भारीपन रहता है या थोड़ा सा खाना खाते ही पेट भरा हुआ लगने लगता है (Early Satiety) तो यह सतर्क होने का समय है। पेट के ऊपरी हिस्से खासकर नाभि के ठीक ऊपर लगातार हल्का या तेज दर्द रहना गैस्ट्रिक कैंसर का मुख्य लक्षण हो सकता है।

बिना किसी डाइट या एक्सरसाइज के अगर शरीर का वजन तेजी से कम हो रहा है तो इसे हल्के में न लें। मल का रंग बहुत गहरा (काला) होना या मल त्याग के समय खून आना पेट के अंदर ट्यूमर या ब्लीडिंग का संकेत हो सकता है। कैंसर कोशिकाएं शरीर की ऊर्जा सोख लेती हैं जिससे व्यक्ति को हर समय कमजोरी और थकावट महसूस होती है।

पेट का कैंसर क्यों होता है? (प्रमुख कारण)

वैज्ञानिकों के अनुसार पेट के कैंसर के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं:

  • H. Pylori इन्फेक्शन: यह एक बैक्टीरिया है जो पेट में अल्सर और सूजन पैदा करता है। अगर इसका समय पर इलाज न हो तो यह कैंसर का रूप ले सकता है।
  • गलत खानपान: ज्यादा मसालेदार, स्मोक्ड फूड (धुएं में पका), प्रोसेस्ड मीट और बाहर का जंक फूड पेट की परत को नुकसान पहुंचाता है।
  • जेनेटिक्स: यदि परिवार में पहले किसी को यह कैंसर रहा है तो अन्य सदस्यों में इसका जोखिम बढ़ जाता है।
  • खराब जीवनशैली: धूम्रपान, शराब का सेवन और शारीरिक सक्रियता की कमी इस बीमारी को न्यौता देते हैं।
  • मोटापा: शरीर का अत्यधिक वजन पेट के अंगों पर दबाव डालता है और कैंसर के रिस्क को बढ़ाता है।

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बचाव के उपाय और जांच

विशेषज्ञों का कहना है कि 40 की उम्र के बाद महिलाओं को अपने पेट के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

  • संतुलित आहार: ताजे फल और हरी सब्जियों को डाइट में शामिल करें।
  • स्क्रीनिंग: यदि लक्षण 2 हफ्ते से ज्यादा बने रहते हैं तो डॉक्टर की सलाह पर एंडोस्कोपी या बायोप्सी करानी चाहिए।
  • वजन नियंत्रण: सक्रिय जीवनशैली अपनाएं और मोटापे से बचें।

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