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अहमदाबाद प्लेन हादसा: मौत को मात देकर बचा एक मुसाफिर, ‘सीट नंबर 11’ की कहानी बनी मिसाल

कभी-कभी ज़िंदगी ऐसे मोड़ पर ले आती है जहाँ मौत सामने खड़ी होती है—but कोई चमत्कार उसे पीछे धकेल देता है। ऐसा ही एक वाकया अहमदाबाद के प्लेन क्रैश में देखने को मिला, जहां एक ऐसा मुसाफिर मौत के मुंह से जिंदा वापस लौट आया, जिसे देखकर हर कोई हैरान है।

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“जाको राखे साईयां…” अहमदाबाद हादसे में एक जिन्दा कहानी अहमदाबाद में हुए भयानक प्लेन क्रैश ने सभी को झकझोर कर रख दिया। हादसा इतना भीषण था कि शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया कि विमान में सवार सभी लोगों की मौत हो चुकी है। लेकिन कुछ ही घंटों बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई—एक व्यक्ति, जो प्लेन में मौजूद था, सही-सलामत बाहर निकल आया।इस शख्स का नाम है रमेश विश्वास कुमार। वह गुजरात से सटे केंद्रशासित प्रदेश दीव के रहने वाले हैं और क्रैश के वक्त विमान की सीट नंबर 11-A पर बैठे थे। हादसे के तुरंत बाद वह प्लेन से कूद गए और जान बचा ली। जो वीडियो सामने आया है, उसमें रमेश विश्वास कुमार सड़क पर खुद चलते नजर आते हैं, हालांकि हल्की लंगड़ाहट साफ दिखाई दे रही है। इसके बावजूद वह होश में थे और उन्होंने मीडिया से बात भी की।

Video Link – https://x.com/ellems00/status/1933167753583833289?t=X2vWMKuzYaaGc6-J5IkLfQ&s=19

धमाके के बाद दिखीं आग की लपटें, पर जान बची तो सबकुछ मिला  –रमेश ने बताया कि जैसे ही विमान में धमाका हुआ, चारों तरफ धुआं और आग की लपटें उठने लगीं। सब कुछ कुछ सेकेंड्स में हुआ, लेकिन उस एक पल में उन्होंने खुद को बचाने का फैसला किया और तुरंत बाहर कूद पड़े।उन्होंने आगे बताया, “मैंने देखा कि चारों तरफ सिर्फ आग और चीखें थीं। मैंने किसी तरह दौड़कर प्लेन से दूरी बनाई और इसके बाद लोगों ने मुझे एंबुलेंस में अस्पताल पहुंचाया।”पुलिस कमिश्नर ने भी पुष्टि की कि रमेश विश्वास कुमार, जो भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक हैं, इस हादसे में जिंदा बचे हैं और उनका इलाज चल रहा है।

जब हर कोई मान बैठा कि कोई नहीं बचा, तब आया ज़िंदगी का सबूत – हादसे के बाद शुरुआती रिपोर्ट्स में न्यूज़ एजेंसी एपी तक ने ये जानकारी दी थी कि विमान में सवार सभी यात्रियों की मौत हो चुकी है। लेकिन दो लोगों के ज़िंदा बच निकलने की खबर ने देशभर में एक नई उम्मीद जगा दी।रमेश विश्वास कुमार का नाम उस लिस्ट में था जिसमें पहले सिर्फ मृतकों के ही नाम देखे जा रहे थे। ऐसे में उनकी वापसी एक चमत्कार से कम नहीं मानी जा रही।वीडियो में वह बिना किसी सहारे के चलते नजर आए—शायद ज़िंदगी की जिद और भगवान का कोई खास आशीर्वाद ही था, जिसने उन्हें इस खतरनाक हादसे से बचा लिया।हादसे की हकीकत और एक आदमी की हिम्मत—सवाल भी हैं, सबक भी इस घटना ने एक बार फिर कई सवाल खड़े कर दिए हैं—विमान की सुरक्षा को लेकर, इमरजेंसी रिस्पॉन्स को लेकर और यात्रियों की ट्रेनिंग को लेकर। लेकिन इसके साथ ही ये कहानी एक बड़ी सीख भी है—कि हिम्मत और सही वक्त पर लिया गया फैसला ज़िंदगी को बचा सकता है। रमेश विश्वास कुमार की कहानी हमें यही बताती है कि जब ज़िंदगी दो सेकंड देती है, तो उसे कैसे जी-जान लगाकर पकड़ना होता है।

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