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अजित डोभाल की रूस यात्रा: रक्षा, ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी में नए अध्याय की तैयारी

भारत-रूस: रक्षा गठबंधन की नई ऊँचाइयाँ-यह लेख भारत और रूस के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग पर प्रकाश डालता है, हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की रूस यात्रा के संदर्भ में। यह यात्रा दोनों देशों के बीच के गहरे संबंधों और भविष्य के सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई है।

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 रक्षा और रणनीतिक साझेदारी: एक नया अध्याय-डोभाल की रूस यात्रा के दौरान, उन्होंने रूस के पहले उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव से मुलाकात की और रक्षा तथा रणनीतिक साझेदारी पर विस्तृत चर्चा की। इसमें सैन्य तकनीक का आदान-प्रदान, संयुक्त परियोजनाओं की प्रगति और नए सहयोग के अवसर शामिल थे। नागरिक विमानन, धातु उद्योग और रसायन उद्योग जैसे क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया। यह सहयोग न केवल दोनों देशों की रक्षा क्षमता को मज़बूत करेगा बल्कि आर्थिक विकास को भी गति देगा। यह साझेदारी दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विश्वास और सहयोग का प्रमाण है, जो भविष्य में और भी मज़बूत होगा। इस यात्रा से भविष्य की रक्षा परियोजनाओं और तकनीकी हस्तांतरण के नए रास्ते खुलेंगे।

 पुतिन से मुलाकात और भारत की स्पष्ट नीति-डोभाल ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पुतिन को भारत आने का निमंत्रण दिया, जिसे पुतिन ने स्वीकार कर लिया। इस मुलाकात में डोभाल ने स्पष्ट किया कि भारत, किसी भी बाहरी दबाव के बावजूद, रूस के साथ हर मोर्चे पर सहयोग जारी रखेगा। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत और रूस का रिश्ता आपसी विश्वास और समान हितों पर आधारित है, जिसे किसी भी वैश्विक परिस्थिति से प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। यह बयान भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को दर्शाता है, खासकर तब जब अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर अतिरिक्त शुल्क लगाया है।

अमेरिकी दबाव और भारत की स्वतंत्र विदेश नीति-डोभाल की यात्रा ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका ने रूस से तेल आयात पर भारत पर अतिरिक्त शुल्क लगाया है। यह कदम भारत पर आर्थिक दबाव डालने की कोशिश है, लेकिन भारत ने साफ़ कर दिया है कि उसकी विदेश नीति स्वतंत्र है और वह अपने रणनीतिक हितों को प्राथमिकता देगा। रूस के साथ भारत का ऊर्जा, रक्षा और तकनीकी सहयोग दशकों पुराना है और इसे किसी भी बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं किया जा सकता। डोभाल की यात्रा न केवल आने वाली पुतिन-भारत मुलाकात की तैयारी है, बल्कि यह भी दिखाती है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित है।

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