
आपके पैरों में दिख रहे ये 7 संकेत, लिवर की सेहत का हो सकते हैं अलार्म!-लिवर, हमारे शरीर का वो सुपरहीरो है जो डाइजेशन से लेकर इम्यूनिटी तक, हर चीज़ को फिट रखता है। ये शरीर से गंदगी बाहर निकालता है और हमें हेल्दी रखता है। पर जब ये बेचारा लिवर कमजोर पड़ने लगता है, तो इसका असर सिर्फ पेट या चेहरे पर ही नहीं, हमारे पैरों पर भी दिखने लगता है। पैरों में होने वाले कुछ छोटे-छोटे बदलाव, लिवर की बड़ी गड़बड़ी का इशारा हो सकते हैं। इन्हें पहचानना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि समय पर ध्यान देने से हम कई बड़ी बीमारियों से बच सकते हैं। आइए, जानते हैं लिवर के खराब होने के वो खास संकेत जो हमारे पैरों में दिखाई देते हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!पैरों में सूजन: कहीं ये पानी का जमाव तो नहीं?-जब हमारा लिवर ठीक से काम नहीं कर पाता, तो शरीर में एक्स्ट्रा पानी जमा होने लगता है। ये पानी सबसे पहले हमारे पैरों, टखनों और पंजों में इकट्ठा होता है, जिससे वहां सूजन आ जाती है। ये सूजन धीरे-धीरे बढ़ती है और खास बात ये है कि आराम करने या पैर ऊपर उठाकर रखने से भी ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। अक्सर हम इसे ज्यादा चलने-फिरने या थकान का नतीजा समझकर इग्नोर कर देते हैं। लेकिन अगर पैरों में सूजन लगातार बनी रहती है, तो ये लिवर की समस्या का एक गंभीर संकेत हो सकता है। इसलिए, अगर आपके पैरों में बार-बार सूजन आ रही है, तो इसे बिल्कुल भी हल्के में न लें और फौरन डॉक्टर से मिलें।
पैरों में खुजली: पित्त का बढ़ा हुआ लेवल?-लिवर की बीमारी होने पर, हमारे शरीर में पित्त (Bile) का बहाव ठीक से नहीं हो पाता। इसकी वजह से पित्त के सॉल्ट्स शरीर में जमा होने लगते हैं। जब ये सॉल्ट्स हमारी स्किन के नीचे इकट्ठा हो जाते हैं, तो खुजली होने लगती है। वैसे तो ये खुजली पूरे शरीर में हो सकती है, लेकिन पैरों में ये सबसे ज्यादा महसूस होती है। खासकर रात के समय ये खुजली और बढ़ जाती है, जिससे नींद आना भी मुश्किल हो जाता है। आम स्किन एलर्जी और लिवर की वजह से होने वाली खुजली में फर्क करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। लेकिन अगर खुजली लंबे समय तक रहे और इसके साथ दूसरे लक्षण भी दिखें, तो ये लिवर खराब होने का इशारा हो सकता है।
पैरों में भारीपन और दर्द: टॉक्सिन्स का असर!-जब लिवर डैमेज होने लगता है, तो शरीर में ज़हरीले पदार्थ यानी टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं। ये टॉक्सिन्स हमारे ब्लड सर्कुलेशन और नर्वस सिस्टम पर बुरा असर डालते हैं। इसी वजह से हमें पैरों में भारीपन, सुन्नपन या दर्द महसूस होने लगता है। कभी-कभी ऐसा लगता है कि पैरों में बिल्कुल भी जान नहीं बची और थोड़ा चलने पर ही बहुत थकान हो जाती है। ये समस्या आम थकावट से अलग होती है क्योंकि आराम करने पर भी इससे राहत नहीं मिलती। अगर आपके पैरों में लगातार दर्द या भारीपन बना रहता है, तो ये लिवर के कमजोर होने का संकेत हो सकता है। ऐसे में इसे नज़रअंदाज़ करना आगे चलकर और भी बड़ी दिक्कतें पैदा कर सकता है।
पैरों में मकड़ी जैसी नसें दिखना (Spider Veins): हार्मोनल गड़बड़ी का संकेत!-लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर लिवर की बीमारियों में, हमारे शरीर के हार्मोनल बैलेंस में गड़बड़ी आ जाती है। इसका असर हमारे पैरों की नसों पर साफ दिखाई देता है। पैरों पर नीली या बैंगनी रंग की छोटी-छोटी नसें दिखने लगती हैं, जिन्हें ‘स्पाइडर वेन्स’ कहते हैं। शुरुआत में ये हल्की लग सकती हैं, लेकिन समय के साथ ये बढ़ जाती हैं और पैरों की खूबसूरती के साथ-साथ सेहत को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं। ये लक्षण बताते हैं कि लिवर का काम ठीक से नहीं चल रहा और हार्मोनल लेवल बिगड़ रहे हैं। अगर आपके पैरों पर अचानक इस तरह की नसें दिखने लगें, तो इसे सामान्य बदलाव समझने की गलती बिल्कुल न करें।
पैरों की स्किन का पीला पड़ना: बिलीरुबिन का खेल!-जब लिवर बिलीरुबिन को ठीक से प्रोसेस नहीं कर पाता, तो ये हमारे शरीर में जमा होने लगता है। इसकी वजह से हमारी स्किन और आंखें पीली पड़ने लगती हैं, जिसे हम जॉन्डिस कहते हैं। कई बार ये पीलापन हमारे पैरों की स्किन पर भी साफ नजर आता है। अगर आपके पैरों का रंग हल्का पीला या बेजान सा दिखने लगे, तो ये एक संकेत है कि लिवर ठीक से काम नहीं कर रहा। लोग अक्सर इसे धूप या धूल-मिट्टी का असर समझ लेते हैं, लेकिन अगर पैरों का पीलापन लगातार बना रहे, तो ये लिवर से जुड़ी एक गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।
पैरों की मांसपेशियां कमजोर होना: पोषण की कमी!-लिवर की गंभीर बीमारियों में, हमारे शरीर की मांसपेशियां कमजोर पड़ने लगती हैं, जिससे ताकत कम हो जाती है। पैरों में ये कमजोरी सबसे पहले महसूस होती है। चलते समय पैरों में जान कम लगना, बार-बार थक जाना और मांसपेशियों में दर्द होना इसके आम लक्षण हैं। जब लिवर खाने से मिलने वाले पोषण को ठीक से प्रोसेस नहीं कर पाता, तो हमारी मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। अगर इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या समय के साथ और भी बढ़ सकती है। इसलिए, पैरों की मांसपेशियों की कमजोरी को सिर्फ उम्र या थकान का नतीजा न समझें, बल्कि लिवर की जांच करवाना भी ज़रूरी है।
पैरों का रंग बदलना: ब्लड सर्कुलेशन पर असर!-लिवर की गड़बड़ी का सीधा असर हमारे ब्लड सर्कुलेशन पर पड़ता है। इसकी वजह से हमारे पैरों का रंग नीला, बैंगनी या गहरा हो सकता है। कभी-कभी पैरों की स्किन पर अजीब से धब्बे या अलग रंग भी दिखाई देते हैं। ये बदलाव इस बात का संकेत देते हैं कि खून का दौरा ठीक से नहीं हो रहा है और इसका एक बड़ा कारण लिवर की बीमारी हो सकती है। आमतौर पर लोग इसे ब्लड प्रेशर या किसी और वजह से जोड़ते हैं, लेकिन लिवर भी इसकी एक अहम वजह हो सकता है। अगर आपके पैरों के रंग में लगातार ऐसे बदलाव दिख रहे हैं, तो इसे हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है।
पैरों में झुनझुनी और सुन्नपन: नर्व्स पर टॉक्सिन्स का अटैक!-लिवर के खराब होने का असर हमारे नर्वस सिस्टम पर भी पड़ता है। जब लिवर शरीर से ज़हरीले पदार्थों को बाहर नहीं निकाल पाता, तो ये नसों को नुकसान पहुंचाने लगते हैं। इसकी वजह से हमारे पैरों में झुनझुनी, जलन या सुन्नपन महसूस होने लगता है। यह स्थिति कभी-कभी इतनी तकलीफदेह हो जाती है कि चलना-फिरना भी मुश्किल हो जाता है। यह सिर्फ आम कमजोरी नहीं, बल्कि लिवर से जुड़ी एक गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। इसलिए, अगर आपके पैरों में बार-बार झुनझुनी या सुन्नपन महसूस हो, तो इसे बिल्कुल भी अनदेखा न करें और फौरन डॉक्टर से सलाह लें।

