
भागवत ने होसबोले के पाकिस्तान पर बयान का बचाव किया
नई दिल्ली। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने पाकिस्तान के साथ बातचीत का रास्ता खोलने की वकालत करने वाले वरिष्ठ आरएसएस पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबोले के बयानों का बचाव करते हुए कहा कि वे पड़ोसी देश के लोगों के बारे में बात कर रहे थे।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!मई में होसबोले की टिप्पणियों पर आरएसएस के नजरिए के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए भागवत ने कहा कि संगठन पाकिस्तान के मामले में केंद्र सरकार की नीति का पालन करेगा।
उन्होंने आरएसएस की शताब्दी के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, लेकिन पाकिस्तान में बहुत से लोग ऐसे हैं जो मानते हैं कि भारत का बंटवारा गलत था और वहां के कई पत्रकार आरएसएस और उसके काम की तारीफ करते हैं। वहां ऐसे लोगों की एक बड़ी संख्या है जो पाकिस्तान-विरोधी हैं और ‘दो-राष्ट्र सिद्धांत’ के खिलाफ हैं। उनका कहना है कि साथ रहना ही बेहतर था।
भागवत ने कहा कि अगर भविष्य में भारत पाकिस्तान को बुरी तरह हरा देता है तो वहां के लोगों को या तो भारत में शामिल करना होगा या फिर उन्हें उसी देश में शांति से रहने लायक बनाना होगा। उन्होंने कहा, और इसके लिए बातचीत के दरवाजे खुले रखने होंगे।
उन्होंने आगे कहा, हम हिटलर जैसे नहीं हैं। यह हमारा स्वभाव या तरीका नहीं है। इसलिए हमें कुछ रास्ते खुले रखने चाहिए। हमें अन्याय और अत्याचार को खत्म करना चाहिए, लेकिन जो अच्छा है उसे बचाकर भी रखना चाहिए। भागवत ने जोर देकर कहा कि किसी भी देश के मामले में आरएसएस की कोई स्वतंत्र विदेश नीति नहीं है और वह केंद्र सरकार के रुख का ही पालन करती है।
जब उनसे पूछा गया कि भारत को पाकिस्तान और उसके द्वारा लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देने के मामले से कैसे निपटना चाहिए तो होसबले ने कहा था, देश की सुरक्षा और आत्म-सम्मान की रक्षा होनी चाहिए और मौजूदा सरकार को इसका ध्यान रखना चाहिए। लेकिन साथ ही हमें बातचीत के दरवाजें बंद नहीं करने चाहिए। हमें उनसे बातचीत करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।
