RADA
व्यापार

Budget Expectations 2026: पेंशन, इंश्योरेंस पर ज्यादा डिडक्शन और सीनियर सिटीजंस के लिए राहत के उपाय होने चाहिए

यूनियन बजट पेश होने की तारीख नजदीक आ गई है। टैक्सपेयर्स बजट में अपने लिए राहत की उम्मीद कर रहे हैं। उन्हें खासकर डिडक्शंस और रिटायरमेंट सिक्योरिटी बढ़ने की उम्मीद है। लोग अब ज्यादा समय तक जीवित रहते हैं। हेल्थकेयर पर आने वाला खर्च बढ़ रहा है। लोगों को रिटायरमेंट बाद के खर्चों का इंतजाम खुद करना पड़ता है। ऐसे में इंश्योरेंस, पेंशंस और सीनियर सिटीजंस के लिए टैक्स बेनेफिट्स बढ़ाने की जरूरत है।

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

1. इंश्योरेंस प्रीमियम पर ज्यादा डिडक्शंस (सेक्शन 80डी)

पिछले कुछ सालों में हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम तेजी से बढ़ा है। इसमें मेडिकल इनफ्लेशन, बढ़ते कवरेज और ज्यादा क्लेम रेशियो का हाथ है। लेकिन, पिछले कई सालों से सेक्शन 80डी के तहत डिडक्शन लिमिट स्थिर है। खुद और परिवार के लिए 25,000, मातापिता के लिए अतिरिक्त 25,000 रुपये और सीनियर सिटीजंस माता-पिता के लिए 50,000 का डिडक्शंस हेल्थ पॉलिसी के प्रीमियम पर क्लेम किया जा सकता है। परिवार के लिए हेल्थ पॉलिसी खरीदने पर 40,000 से 60,000 रुपये का प्रीमियम आता है। इसलिए खुद और परिवार के लिए डिडक्शन बढ़ाकर 50,000 रुपये और सीनियर सिटीजंस पेरेंट के लिए 75,000 रुपये करने की जरूरत है।

2. पेंशन, रिटायरमेंट सेविंग्स को मजबूत बनाने की जरूरतअभी सुपरएनुएशन फंड (SAF) से नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) में रिटायरमेंट कॉर्पस ट्रांसफर करने पर टैक्स नहीं लगता है। लेकिन प्रोविडेंट फंड से एनपीएस में ट्रांसफर करने पर टैक्स लगता है। पीएफ से एनपीएस में ट्रांसफर को टैक्स-फ्री करने की जरूरत है। इससे सीनियर सिटीजंस को रिटायरमेंट प्लानिंग में मदद मिलेगी। इसके अलावा एनपीएस में एंप्लॉयी के कंट्रिब्यूशन पर डिडक्शन की लिमिट कम है। ज्यादा लॉन्ग टर्म इनवेस्टमेंट के लिए इसे बढ़ाने की जरूरत है। FY26 से नई रीजीम में एनपीएस में एंप्लॉयर के कंट्रिब्यूशन की लिमिट 10 से बढ़ाकर 14 फीसदी कर दी गई। लेकिन एंप्लॉयीज की तरफ से उसी फंड में कंट्रिब्यूशन पर कोई टैक्स बेनेफिट नहीं मिलता है। रिटायरमेंट सेविंग्स को बढ़ावा देने के लिए इस नियम में बदलाव की जरूरत है।

3. सीनियर सिटीजंस के लिए राहत

बढ़ते इनफ्लेशन, इलाज का खर्च और फिक्स्ड इनकम के स्रोतों पर निर्भरता की वजह से सीनियर सिटीजंस वित्तीय रूप से समाज का सबसे कमजोर वर्ग है। अभी ओल्ड रीजीम में सेक्शन 80टीटीबी के तहत इंटरेस्ट पर 50,000 रुपये का डिडक्शन और ज्यादा बेसिक एग्जेम्प्शन की सुविधा सीनियर सिटीजंस को मिलती है। लेकिन, बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाला इंटरेस्ट मुश्किल से इनफ्लेशन का मुकाबला कर पाता है। कई रिटायर्ड लोगों के लिए इंटरेस्ट इनकम इनकम का प्रमुख स्रोत है। सरकार को इनकम टैक्स की नई रीजीम में भी भी ये राहत देनी चाहिए। साथ ही सीनियर सिटीजंस के लिए बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट भी बढ़ाना चाहिए।

सरकार नई रीजीम को भविष्य की रीजीम के रूप में स्थापित करना चाहती है। ऐसे में टैक्सपेयर्स के सामने आने वाली चुनौतियों को हल करने की जरूरत है। हेल्थ इंश्योरेंस पर डिडक्शन बढ़ाने, रिटायरमेंट सेविंग्स को बढ़ावा और टैक्स-फ्रेंडली रिटायरमेंट कॉर्पस के लिए उपाय करने की जरूरत है। इनक्लूसिव टैक्स सिस्टम के लिए आसान और पर्याप्त सोशल प्रोटेक्शन वाले संतुलित रिफॉर्म एजेंडा पर फोकस जरूरी है।

Join Us
Back to top button
12 हजार से भी कम, 8GB रैम और 5G सपोर्ट के साथ 25,000 में ट्रेन से 7 ज्योतिर्लिंग यात्रा, जानें पूरा पैकेज और किराया IRCTC Bharat Gaurav चलेगी 10 पैसे प्रति किलोमीटर e-Luna Prime,सस्ती इलेक्ट्रिक बाइक iPhone से Pixel तक स्मार्टफोन पर बेस्ट डील्स, आज आखिरी मौका