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चंडीगढ़ विश्वविद्यालय ने तुर्किए एवं अजरबैजान के 23 विश्वविद्यालयों से अनुबंध तोड़ा

चंडीगढ़ । निजी क्षेत्र की प्रतिष्ठित चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को समर्थन देने के कारण तुर्किए और अज़रबैजान की 23 यूनिवर्सिटी से तत्काल एमओयू रद्द कर दिए हैं। राज्यसभा सांसद और सीयू के चांसलर सतनाम सिंह संधू ने शनिवार को जारी जानकारी में बताया कि यह सभी एमओयू पांच वर्षों तक चलने वाले थे। जिसमें जनवरी 2025 में अंकारा यिल्डिरिम बेयाजित यूनिवर्सिटी के साथ किया एमओयू भी शामिल है।

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संधू ने कहा कि चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी का दृष्टिकोण हमेशा राष्ट्र प्रथम की भावना से जुड़ा रहा है और उसी दृष्टिकोण के अनुरूप, हमने तुर्किए और अज़रबैजान के साथ अपने सभी शैक्षिक संबंधों (एमओयू) को तत्काल समाप्त करने का निर्णय लिया है। जब राष्ट्रीय सुरक्षा की बात आती है तो हमारे लिए देश से अधिक महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है। भारत की अखंडता और संप्रभुता के आगे किसी भी चीज़ से समझौता नहीं करेंगे। संधू ने कहा कि जैसा कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आतंकवाद के आरोपितों और उनकी मदद करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी भी आतंकवाद और इसे प्रायोजित करने वालों के खिलाफ लड़ाई में पूरे देश के साथ खड़ी है। इन समझौता ज्ञापनों के तहत चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी नियमित कोर्सेज स्टूडेंट और फैकल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम, अकादमिक एक्सचेंज प्रोग्राम, रिसर्च प्रोजेक्ट्स, कर्मचारियों के आदान-प्रदान के लिए तुर्की और अज़रबैजान में उच्च शिक्षा संस्थानों के साथ सहयोग कर रहा था। लेकिन यह वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है कि तुर्किए और अज़रबैजान ने कठिन समय के दौरान भारत की स‌द्भावना, सहायता और रणनीतिक समर्थन प्राप्त करने के बावजूद अब पाकिस्तान के साथ गठबंधन कर लिया है, जो आतंकवाद के साथ अपने संबंधों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है।

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