
ईरान युद्ध में ‘चीन का दखल’, AI से अमेरिकी सेना की मूवमेंट ट्रैक कर रही थीं कंपनियां, ट्रंप ने काटी ‘सप्लाई’
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी जंग अब काफी आगे बढ़ गया है. मिसाइल और ड्रोन के साथ-साथ अब इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी इस्तेमाल हो रहा है. ईरानी सेना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ओपन-सोर्स डेटा का इस्तेमाल कर अमेरिकी ठिकानों और सेना पर अटैक कर रही है. ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी सैटेलाइट इमेजनरी कंपनी से मिडिल ईस्ट के इलाकों की तस्वीर जारी करने से मना कर दिया है, ताकि ईरान उन्हें ट्रैक न कर सके. ऐसे भी आरोप लग रहे हैं कि ईरान को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ओपन-सोर्स डेटा का इस्तेमाल करने में चीन की कंपनियां मदद कर रही हैं.
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!अमेरिकी सैटेलाइट इमेजनरी कंपनियों को ट्रंप का आदेश
युद्ध अब तकनीक के सहारे लड़े और जीते जाते हैं. यह बात ईरान भी अच्छी तरह समझता है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका को लगता है ईरान अमेरिकी कंपनियों के सैटलाइट इमेज का इस्तेमाल कर अमेरिकी सैन्य बेस पर हमला कर रही है. ऐसे में अमेरिका ने सभी सैटेलाइट इमेजनरी कंपनी से मिडिल ईस्ट के इलाकों की तस्वीर जारी करने से मना कर दिया है. इसके बाद से ईरान जंग के बीच मैक्सर जैसी बड़ी कंपनियों ने भी मिडिल ईस्ट की तस्वीरें जारी करने से इनकार कर दिया है. बता दें कि मैक्सर अमेरिकी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और उपग्रह इमेजरी कंपनी है, जो हाई -रिज़ॉल्यूशन अर्थ ऑब्जर्वेशन डेटा देती है.
क्या चीनी कंपनियां दे रहीं ईरान का साथ?
चीनी कंपनियां ईरानी संघर्ष के दौरान अमेरिकी सेना की गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ओपन-सोर्स डेटा का इस्तेमाल कर रही हैं. द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, चीन की कई प्राइवेट कंपनियां ऐसे इंटेलिजेंस टूल्स की मार्केटिंग कर रही हैं, जो अमेरिकी सेना की गतिविधियों को एक्सपोज करने का दावा करते हैं. हालांकि, चीन ने खुद को सार्वजनिक तौर पर खुद को इस संघर्ष से दूर रखने का दावा किया है. कंपनियां मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना की तैनाती का विस्तार से विश्लेषण करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को पब्लिकली मौजूद डेटा के साथ मिला रही हैं. इस डेटा में सैटेलाइट इमेजरी, फ्लाइट ट्रैकर और शिपिंग जानकारी शामिल है.

