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छत्तीसगढ़

अवैध प्लॉटिंग पर विधानसभा में घमासान, मंत्री के जवाब से नाराज़ विपक्ष का वॉकआउट

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के प्रश्नकाल में धमतरी और कांकेर जिले में अवैध प्लॉटिंग का मुद्दा पहले ही सवाल में जोरदार तरीके से गूंजा। सत्ता पक्ष की ओर से दिए गए जवाब को असंतोषजनक बताते हुए विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन (वॉकआउट) कर दिया।
प्रश्नकाल के दौरान विधायक अंबिका मरकाम ने अवैध प्लॉटिंग को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों और उन पर हुई कार्रवाई की जानकारी मांगी। उन्होंने पूछा कि क्या शिकायतों के बावजूद कई मामलों में जांच नहीं हुई और क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
इस पर राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने जवाब दिया कि धमतरी में 3 और उत्तर बस्तर कांकेर में 5 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। धमतरी में नगर निगम द्वारा जांच कर अवैध प्लॉटिंग बंद कराई गई, जबकि कांकेर में कई लोगों पर कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि कई अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं और कुछ के भुगतान रोके गए हैं।
मंत्री ने कहा कि प्रदेशभर में अवैध प्लॉटिंग रोकने के लिए जिला स्तर पर कमेटियां गठित की जाएंगी, जिनकी अध्यक्षता कलेक्टर करेंगे और नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। साथ ही 14 खसरा नंबरों में खरीदी-बिक्री पर रोक लगाने की भी जानकारी दी।
हालांकि, मंत्री के जवाबों में विरोधाभास भी सामने आया। पहले पटवारी को निलंबित करने की बात कही गई, लेकिन बाद में मंत्री ने स्पष्ट किया कि “मेरे मुंह से गलती से निलंबन निकल गया, वास्तव में नोटिस देकर वेतन रोका गया है।” उन्होंने यह भी बताया कि 3 पटवारियों को प्रारंभिक रूप से दोषी पाया गया है और उनका स्थानांतरण किया गया है, जबकि 67 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार को घेरते हुए पूछा कि प्रदेश में अब तक कितनी अवैध कॉलोनियां बनीं, कितनों पर कार्रवाई हुई और क्या इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी।
विधायक अजय चंद्राकर ने भी मंत्री के जवाबों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कर्मचारियों को “बलि का बकरा” बनाया जा रहा है और वास्तविक दोषियों पर कार्रवाई स्पष्ट नहीं है। वहीं विधायक ओमकार साहू ने अवैध प्लॉटिंग का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की।
मंत्री ने जवाब में कहा कि 10-12 जिलों में जिला स्तरीय समितियों का गठन किया जा चुका है और जहां-जहां अवैध कॉलोनियां बन रही थीं, वहां कार्रवाई करते हुए मार्ग अवरुद्ध किए गए और मुरूम हटाया गया है।
इसके बावजूद विपक्ष मंत्री के जवाबों से संतुष्ट नहीं हुआ और मामले की स्वतंत्र जांच, यहां तक कि विधानसभा समिति या उच्चस्तरीय एजेंसी से जांच की मांग करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।

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