
पंजाब में बाढ़ से तबाही: सरकार ने शुरू की विशेष गिरदावरी, 45 दिनों में मिलेगा मुआवज़ा
पंजाब में बाढ़ का कहर: सरकार का बड़ा ऐलान, अब हर प्रभावित को मिलेगा पूरा हक़!
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बाढ़ का तांडव: जब प्रकृति ने बरपाया कहर-पंजाब इस बार कुदरत के रौद्र रूप का गवाह बना, जब विनाशकारी बाढ़ ने राज्य के कोने-कोने को अपनी चपेट में ले लिया। किसानों की मेहनत से लहलहाती फसलें पल भर में पानी में समा गईं, लोगों के सिर से छत छिन गई और कई परिवारों को तो अपने प्रियजनों को भी खोना पड़ा। इस भयानक तबाही ने आम आदमी के जीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। हर तरफ मायूसी और लाचारी का आलम था। ऐसे मुश्किल हालात को देखते हुए, पंजाब सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए पूरे राज्य में एक विशेष गिरदावरी (नुकसान का सर्वे) शुरू करने का फैसला किया है। इसका सीधा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बाढ़ से जो भी असली नुकसान हुआ है, उसका सही-सही पता लगाया जा सके। सरकार चाहती है कि हर वो परिवार जो इस आपदा से प्रभावित हुआ है, उसे उसका पूरा हक और उचित मुआवज़ा मिले, ताकि वे फिर से अपने पैरों पर खड़े हो सकें। यह कदम सरकार की संवेदनशीलता और प्रभावितों के प्रति उनकी जिम्मेदारी को दर्शाता है।
‘यह हक़ है, अहसान नहीं’: मंत्री का स्पष्ट संदेश-राजस्व, पुनर्वास और आपदा प्रबंधन मंत्री, हरदीप सिंह मुंडियां ने इस मामले पर बिल्कुल स्पष्ट रुख अपनाया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि बाढ़ पीड़ितों को जो मुआवज़ा दिया जा रहा है, वह कोई सरकार का अहसान नहीं है, बल्कि हर उस नागरिक का मौलिक अधिकार है जिसने इस आपदा में अपना सब कुछ खोया है। उन्होंने अपने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस पूरी मुआवज़ा वितरण प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी और बेहद तेज़ी से पूरा किया जाए। किसी भी स्तर पर कोई भी कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी जरूरतमंद परिवार मुआवज़े की राशि से वंचित न रह जाए। सरकार का यह रवैया दर्शाता है कि वे पीड़ितों की पीड़ा को समझते हैं और उन्हें जल्द से जल्द राहत पहुंचाना चाहते हैं। यह सिर्फ पैसों की बात नहीं, बल्कि खोए हुए विश्वास को फिर से जीतने का प्रयास है।
45 दिन का इंतज़ार, फिर मिलेगा राहत का चेक: सीएम की घोषणा-पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बाढ़ से प्रभावित सभी परिवारों को एक बड़ा भरोसा दिलाया है। उन्होंने घोषणा की है कि किसी भी बाढ़ पीड़ित परिवार को मुआवज़े के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सरकार का लक्ष्य है कि अगले 45 दिनों के भीतर, सभी प्रभावित लोगों को उनके मुआवज़े के चेक सौंप दिए जाएं। इस वादे को पूरा करने के लिए, ज़मीनी स्तर पर काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है। हर विभाग अपनी भूमिका निभा रहा है ताकि समय सीमा के अंदर यह काम पूरा हो सके। कैबिनेट मंत्री हरदीप मुंडियां ने इस संबंध में अधिकारियों को सख्त हिदायत भी दी है कि यदि किसी भी स्तर पर जानबूझकर देरी की जाती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि राहत पहुंचाने का काम पूरी ईमानदारी, जवाबदेही और पारदर्शिता के साथ संपन्न हो।
2167 जांबाज पटवारी: गांव-गांव जाकर कर रहे नुकसान का जायजा-बाढ़ से हुए भारी नुकसान का सही-सही आकलन करने के लिए, पंजाब सरकार ने राज्य भर में 2167 पटवारियों की विशेष टीमें गठित की हैं। ये जांबाज सरकारी कर्मचारी गांव-गांव जाकर हर खेत का बारीकी से निरीक्षण कर रहे हैं। वे यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि कहीं भी कोई नुकसान छूट न जाए। ये टीमें यह भी देख रही हैं कि कितनी फसलें बर्बाद हुई हैं, किन घरों को कितना नुकसान पहुंचा है और दुर्भाग्यवश, कितने पशुओं की मौत हुई है। हर जिले में अलग-अलग अधिकारियों की तैनाती की गई है ताकि यह सर्वे का काम समय पर और कुशलता से पूरा हो सके। अमृतसर, गुरदासपुर, होशियारपुर और पटियाला जैसे जिन जिलों में बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रहा है, वहां पटवारियों की संख्या भी बढ़ाई गई है ताकि नुकसान का सटीक अनुमान लगाया जा सके।
मुआवजे का ऐलान: किसानों और परिवारों को मिलेगी बड़ी राहत-पंजाब सरकार ने बाढ़ पीड़ितों के लिए मुआवज़े की राशि को लेकर स्पष्ट नियम तय कर दिए हैं, जिससे लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। किसानों के लिए, प्रति एकड़ फसल के नुकसान पर 20,000 रुपये का मुआवज़ा दिया जाएगा। यह उन किसानों के लिए बड़ी राहत है जिनकी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। जिन लोगों के घर पूरी तरह से ढह गए हैं, उन्हें 1,20,000 रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी। वहीं, जिन घरों को आंशिक नुकसान हुआ है, उनके मालिकों को 40,000 रुपये दिए जाएंगे। पशुधन के नुकसान को भी सरकार ने अपनी प्राथमिकता में रखा है। एक गाय या भैंस की मौत पर 37,500 रुपये और बकरी की मौत पर 4,000 रुपये का मुआवज़ा देने का प्रावधान किया गया है। मंत्री मुंडियां का कहना है कि यह अब तक का सबसे बड़ा मुआवज़ा पैकेज है जो राज्य सरकार अपने नागरिकों को दे रही है।
1.98 लाख हेक्टेयर फसल तबाह, 56 लोगों की गई जान: आंकड़े बताते हैं दर्द-सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में बाढ़ ने लगभग 1,98,525 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे भारी फसल नुकसान हुआ है। गुरदासपुर, फाजिल्का, अमृतसर और पटियाला जैसे जिले इस तबाही से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा, मोगा, कपूरथला और फिरोजपुर जैसे जिले भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, जहाँ जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। यह सिर्फ फसलों और घरों का नुकसान नहीं है, बल्कि इस विनाशकारी बाढ़ ने कई अनमोल जिंदगियों को भी छीन लिया है। पिछले 24 घंटों में मोगा जिले में एक और दुखद मौत की खबर आई है, जिसके बाद बाढ़ से मरने वालों की कुल संख्या अब 56 हो गई है। यह आंकड़ा बाढ़ की भयावहता और उसके विनाशकारी प्रभाव को दर्शाता है।
समय पर मिलेगा मुआवज़ा, सरकार की पैनी नज़र-पंजाब के राजस्व मंत्री ने स्पष्ट किया है कि राहत राशि का वितरण तय समय-सीमा के भीतर ही किया जाएगा। जिन गांवों में पूरी की पूरी फसल तबाह हो गई है, उन परिवारों तक एक महीने के अंदर मदद पहुंचा दी जाएगी। वहीं, घरों और पशुओं के नुकसान के लिए मुआवज़े का भुगतान 15 सितंबर से शुरू कर दिया जाएगा। सरकार इस पूरी प्रक्रिया पर हर दिन, हर पल अपनी पैनी नज़र रखे हुए है ताकि किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही न हो और यह सुनिश्चित किया जा सके कि जरूरतमंदों को समय पर सहायता मिले। सरकार का यह प्रयास केवल आर्थिक मदद पहुंचाना ही नहीं है, बल्कि उन लोगों को फिर से खड़ा करना है जो इस बाढ़ की वजह से टूट गए हैं, उन्हें जीने की एक नई उम्मीद देना है।

