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क्या मालेगांव ब्लास्ट केस के फैसले ने ‘भगवा आतंकवाद’ की बहस को बदल दिया?

 मालेगांव धमाका: धामी का कांग्रेस पर तीखा हमला और एक लंबा विवाद

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धामी का आरोप: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मालेगांव बम धमाके केस में सभी आरोपियों के बरी होने के बाद कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला है। उनका कहना है कि कांग्रेस ने ‘भगवा आतंकवाद’ जैसे झूठे आरोपों से साधु-संतों और सनातन संस्कृति को बदनाम करने की कोशिश की। धामी ने इस फैसले को उन लोगों के पापों का पर्दाफाश बताया है जिन्होंने राष्ट्रभक्तों पर झूठे इल्ज़ाम लगाए। उन्होंने कांग्रेस से देश से माफ़ी मांगने की अपील भी की है।

मालेगांव धमाका: एक दर्दनाक याद: 29 सितंबर 2008 को मालेगांव में हुए इस भीषण धमाके में 6 लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। धमाके की तीव्रता इतनी ज़्यादा थी कि आसपास की इमारतें भी तबाह हो गईं। महाराष्ट्र एटीएस ने शुरू की गई जांच में कुछ हिंदू संगठनों पर शक हुआ था। साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित इस मामले में मुख्य आरोपी थे।

17 साल बाद फैसला: 17 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, NIA की विशेष अदालत ने सभी सात आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। कोई भी गवाह अदालत में अपने बयान पर कायम नहीं रहा। इस फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। बीजेपी इसे कांग्रेस के ‘झूठे नैरेटिव’ पर एक बड़ा झटका मान रही है, जबकि विपक्ष की प्रतिक्रियाएँ अलग-अलग हैं। यह फैसला ‘भगवा आतंकवाद’ के मुद्दे को फिर से बहस के केंद्र में ला दिया है।

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