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सस्ते आलू से किसान परेशान, इतनी गिरी कीमत कि नहीं निकाल पा रहे लागत, सड़क पर फसल फेंकने को मजबूर

बिजनेस डेस्कः सीजन की शुरुआत में ही आलू की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिल रही है। देश के अलग-अलग राज्यों की मंडियों में आलू के दाम इस कदर टूट गए हैं कि किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही। हालात ऐसे बन गए हैं कि कुछ जगहों पर किसान अपनी उपज सड़कों पर फेंकने को मजबूर हैं।

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क्यों गिर रहे हैं आलू के दाम?

विशेषज्ञों के मुताबिक आलू की कीमतों में गिरावट के पीछे दो बड़ी वजहें हैं। पहली, पिछले साल का भारी स्टॉक अभी भी कोल्ड स्टोरेज में पड़ा हुआ है। दूसरी, इस साल मौसम अनुकूल रहने से बंपर पैदावार की उम्मीद है। कारोबारियों का कहना है कि मौजूदा महीने में आलू के दाम दबाव में रह सकते हैं, हालांकि अगले महीने से कुछ सुधार की संभावना जताई जा रही है।

प्रमुख मंडियों में थोक भाव का हाल

  • आगरा (यूपी): 900–1,250 रुपए से गिरकर 500–650 रुपए प्रति क्विंटल
  • कोलकाता (पश्चिम बंगाल): 1,500–1,550 से घटकर 1,100–1,200 रुपए
  • इंदौर (मध्य प्रदेश): 500–1,400 से गिरकर 300–900 रुपए
  • दिल्ली मंडियां: 800–1,400 से घटकर 300–900 रुपए प्रति क्विंटल

खुदरा बाजार में भी सस्ता हुआ आलू

मंडियों में गिरावट का असर खुदरा बाजार पर भी पड़ा है। पिछले महीने जहां आलू 20–25 रुपए किलो बिक रहा था, अब वह 13–20 रुपए किलो के दायरे में आ गया है।

आवक ज्यादा, खपत कम

दिल्ली की आजादपुर मंडी के कारोबारी विनेश कुमार के मुताबिक, मंडी में आलू की खपत जहां 90–100 गाड़ियों की है, वहीं आवक 130–140 गाड़ियों की हो रही है। मांग से ज्यादा सप्लाई के चलते दामों पर दबाव बना हुआ है।

कोल्ड स्टोरेज अब भी खाली नहीं

पश्चिम बंगाल कोल्ड स्टोर संघ के अनुसार राज्य के कोल्ड स्टोरेज में अभी भी करीब 50 लाख बोरी आलू बचा हुआ है। मध्य प्रदेश में भी कोल्ड स्टोरेज के जनवरी मध्य तक खाली होने की उम्मीद है। पुराने स्टॉक के साथ-साथ नए आलू की आवक ने कीमतों को और गिरा दिया है।

उत्पादन बढ़ने की उम्मीद

राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान के पूर्व निदेशक आर. पी. गुप्ता के मुताबिक, अनुकूल मौसम के कारण इस साल आलू का उत्पादन करीब 5 फीसदी बढ़ सकता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2024-25 में उत्पादन 581 लाख टन रहा था, जबकि इस साल इसके 600 लाख टन से ज्यादा होने की संभावना है।

लागत भी नहीं निकल पा रही

उत्तर प्रदेश के आलू किसान बटुक नारायण मिश्रा का कहना है कि किसानों को फिलहाल 5–6 रुपए किलो भाव मिल रहा है, जबकि लागत 8 रुपए किलो से ज्यादा है। गेहूं की बुवाई के लिए खेत खाली करना मजबूरी बन गया है, इसलिए नुकसान के बावजूद आलू निकालना पड़ रहा है।

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